माता-पिता दोनों के सरकारी नौकरी में होने पर यदि मां की मृत्यु हो जाती है तो उसके पुत्र को मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति नहीं मिलेगी। हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर दाखिल विशेष अपील खारिज कर दी है। एकल न्यायपीठ ने इसे पहले ही खारिज कर दिया था। फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि यह नहीं माना जा सकता है कि पुत्र केवल मां का आश्रित था। ऐसा तभी माना जा सकता है जब मां तलाकशुदा हो या एकल अभिभावक हो।
संतोष कुमार भारती की अपील पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई की। अपीलार्थी की मां कौशल्या देवी सीनियर प्राइमरी स्कूल बिसार बलिया में प्रधानाचार्या थी। सेवा काल के दौरान ही दिसंबर 2012 में उनकी मृत्यु हो गई। संतोष ने मृतक आश्रित कोटे के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए अर्जी दाखिल की। विभाग ने अर्जी यह कहते हुए निरस्त कर दी कि पिता के सरकारी नौकरी में रहते हुए बेटे को मृतक आश्रित नहीं माना जा सकता है।
अनुकंपा नियुक्ति योजना का उद्देश्य कर्मचारी की मृत्यु से बेसहारा हुए परिवार को सहारा देना है। पिता के सरकारी नौकरी में रहते हुए पुत्र को बेसहारा नहीं माना जा सकता है। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। न्यायमूर्ति बी अमित स्थालेकर ने याचिका खारिज कर दी थी। विशेष अपील में भी खंडपीठ ने एकल जज के आदेश को सही ठहराया है।