कपूरथला में जेसीबी के सहारे पैंटून पुल हटाते विभाग के कर्मचारी।
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पांटून के अभाव में गंगा पर बनने वाले पुलों का निर्माण बाधित होने से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पीपा न मिल पाने से कई जगह काम ठप है। कहा जा रहा है कि मेला क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए पुलों की संख्या तो बढ़ाई गई, लेकिन पांटून पर्याप्त संख्या में नहीं बनाए जा सके। पुराने पांटून के इस्तेमाल के बावजूद बात नहीं बन पा रही है। सीएम के आगमन से पहले कुंभ मेलाधिकारी ने पांटून पुलों के निर्माण की स्थिति की समीक्षा की तो पता चला कि अभी 15 पुल नहीं बन सके हैं। पुल निर्माण में देरी की वजहों पर पीडब्ल्यूडी के 15 सहायक अभियंताओं से स्पष्टीकरण तलब कर लिया गया। मेला प्रशासन ने लेटलतीफी के जिम्मेदार अभियंताओं को चेताया है कि 15 दिसंबर तक काम पूरे नहीं हुए तो संबंधितों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
कुंभ के 32सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरैल से फाफामऊ के बीच बनने वाले 22 पांटून पुलों का निर्माण होना है। पहले तो देर से काम शुरू हुआ, अब पांटून की कमी पड़ने से अभियंताओं के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। अरैल अप, डाउन, जगदीश मार्ग, नागवासुकि, भारद्वाज समेत कई पुलों का काम पांटून न मिलने से ठप हो गया है। कई जगहों पर पुराने और खराब पांटून लगाने पड़े हैं। कुछ पुराने पांटून लगाते ही डूबने लगे तो हटा दिए गए। स्टोर में पांटून न होने से किचकिच शुरू हो गई है। पांटून की कमी होने पर मदरा-टेला और लटकहा के अस्थाई पुलों के पांटून भी मंगाए जा रहे हैं। इसके बाद भी भरपाई को लेकर मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के एक्सईएन आरबी राम का कहना है कि पुराने पांटून को मिलाकर ही इस्टीमेट बनाया गया था। इसलिए पुराने पांटून का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुराने पांटून खराब नहीं हुए हैं, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है। इस बीच कुंभ मेलाधिकारी ने पांटून पुलों के पिछड़े काम को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रांतीय खंड, निर्माण खंड एक, तीन, चार और पांच के सहायक अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी की है।
पुल निर्माण में लगी सड़ी लकड़ियां निकाली गईं
प्रयागराज। कुंभ में श्रद्धालुओं को गंगा पार होने के लिए बनाए जा रहे पुलों में सड़ी लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई। अरैल अप से 30 से अधिक सड़े पटरे निकाल कर हटाए गए। लेकिन, पुराने पटरे जस के तस रह गए। इस पुल के बाकी हिस्से में अब नए शाल स्लीपर का इस्तेमाल किया जाएगा। मंडलायुक्त आशीष कुमार गोयल ने बताया कि पांटून पुल के निर्माण में जहां भी सड़ी लकड़ी लगी होगी, उसे निकलवाया जाएगा। इससे पहले मुख्य अभियंता ने पुराने और खराब पटरों को हटवाने का निर्देश दिया था। कहा जा रहा है कि सभी सेक्टरों में पांटून पुलों के निर्माण में पुरानी लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। प्रांतीय खंड के एक्सईएन आरबी राम ने बताया कि पुलों के लिए तैयार किए गए इस्टीमेट में ही पुरानी लकड़ी शामिल है। इसलिए स्टोर में पड़ी पुरानी लकड़ी का इस्तेमाल किया जा रहा है। जहां भी सड़ी और खराब लकड़ी लगाई गई है, उसे हटवाया जा रहा है। अमर उजाला ने पांटून पुल के निर्माण में सड़ी लकड़ी लगाने का खुलासा किया था।