पंचायत चुनाव में इस बार सबकी नजर यमुनापार पर है, क्योंकि सभी धुरंधरों ने यमुनापार से ही पर्चा भरा है। हालांकि धुरंधरों को भी इस बार अपनी जमीन खिसकती नजर रही है। यही वजह है कि जिला पंचायत सदस्य पद के लिए नामांकन कराने वाले प्रत्याशियों में किसी ने दो-दो वार्ड से पर्चा दाखिल किया है तो किसी ने करीबी रिश्तेदार का नामांकन करा दिया है ताकि कुर्सी हाथ से न फिसले और परिवार का कब्जा बरकरार रहे।
लोकसभा चुनाव-2014 में जनता ने सपा और बसपा को जबर्दस्त झटका दिया। ऐसे में जिला पंचायत के चुनाव में वोटर किसे अपना समर्थन देंगे, इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जिला पंचायत की निवर्तमान अध्यक्ष रेखा सिंह ने अगर चुनाव जीतती हैं तो सपा से जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सबसे तगड़ी दावेदार होंगी लेकिन लोकसभा चुनाव में सपा को जो हश्र हुआ, उसे देखते हुए प्रत्याशी के लिए भी अंदाज लगा पाना मुश्किल हो गया है कि वोटर किसके साथ जा रहे हैं। इस बार चुनाव में भाजपा और सपा ने भी जिला पंचायत सदस्य पद के लिए पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है।
ऐसे में लड़ाई और भी रोमांचक होने जा रही है। यही वजह है कि जिला पंचायत की निवर्तमान अध्यक्ष को शंकरगढ़ ब्लॉक के दो अलग-अलग वार्डों से जिला पंचायत सदस्य पद के लिए पर्चा दाखिल करना पड़ा। ठीक यही स्थिति बसपा के साथ भी है, क्योंकि लोकसभा 2014 के चुनाव में उसकी हालत सपा से भी ज्यादा खराब थी। यूपी में उसका पूरी तरह से सफाया हो गया था। बसपा से जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष केशरी देवी पटेल इस बार भी चुनाव मैदान में हैं। उन्होंने शंकरगढ़ ब्लॉक से नामांकन पत्र दाखिल किया लेकिन साथ ही बगल वाले वार्ड से अपनी बहू लक्ष्मी सिंह पटेल का नामांकन करा दिया है। रेखा सिंह का दो-दो वार्ड से नामांकन और केशरी देवी के साथ उनकी बहू का भी चुनाव मैदान में आना इस बात का संकेत है कि धुरंधरों को कहीं न कहीं अपनी सियासी जमीन खिसकती नजर आ रही है।