गोरखपुर के तहसील सदर स्थित ग्राम अकोलाही में चारागाह भूमि पर पंचायत भवन नहीं बनेगा। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप पर जिलाधिकारी ने अपना फैसला वापस ले लिया है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला प्रशासन के अधिकारियों की ओर से बिना राजस्व रिकॉर्ड देखे और बिना मौके का मुआयना किए जारी किए गए विवादित आदेश पर नाराजगी जताई है।
याची रामशंकर और नौ अन्य ने ग्राम अकोलाही में चारागाह की जमीन पर भूमि प्रबंधन समिति की ओर से पंचायत भवन का निर्माण कराने के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि गांव में पहले से ही पंचायत भवन मौजूद है और कानूनन चारागाह की भूमि का स्वरूप बदले बिना उस पर कोई निर्माण नहीं किया जा सकता।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब कोर्ट ने निर्देश मांगे तब जिला प्रशासन की ओर से प्रस्तुत निर्देशों में बताया गया कि डीएम गोरखपुर ने 21 फरवरी 2026 को पंचायत भवन के लिए इस भूमि के एक हिस्से के अधिग्रहण का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में जब यह पता चला कि उक्त भूमि संरक्षित श्रेणी में आती है तो उन्होंने अपने पिछले आदेश को रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट ने इस बात को अत्यंत चौंकाने वाला माना कि डीएम ने भूमि की प्रकृति की जांच किए बिना ही अधिग्रहण का आदेश पारित कर दिया था। न्यायालय ने जिलाधिकारी को उन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है जिन्होंने उन्हें गलत रिपोर्ट दी।