फैब्रिक्स पर चुनरी पर गोटा पट्टी, तोला वर्क, साड़ियाें-सूट पर तारकशी, पत्तीवर्क, प्रिंटेड लान, कराची वर्क, प्रिंटेड लॉन और लजीज व्यंजनों में सिंधी बिरयानी, कराची हलवा, चिकेन नहारी, लाहौरी चिकेन, चिकेन बर्रा। यह सभी कुछ पाकिस्तान की खासियत है।
इन सब के जरिए पाकिस्तानी तहजीब, संस्कृति और स्वाद को बखूबी समझा जा सकता है। आपको इसी पाकिस्तानी स्वाद और संस्कृति से रूबरू कराने खुद पाकिस्तान से लोग आपके शहर में आपके बीच पहुंचे हुए हैं। होटल इलावर्त में शुक्रवार से इंडो-पाक लाइफ स्टाइल प्रदर्शनी एवं फूड फेस्टिवल ‘अमन के सात रंग’ का आगाज हुआ। जिसका उद्घाटन जस्टिस अरुण टंडन, मंडलायुक्त राजन शुक्ला और डीएम संजय कुमार ने किया। मंडलायुक्त ने कहा कि इस तरह से आयोजन से दोनों देशों के सांस्कृतिक और व्यवसायिक रिश्ते प्रगाढ़ होंगे।
दि प्लानर्स, उत्तर प्रदेश पर्यटन और पीएचडी चैम्बर्स के संयुक्त तत्वावधान में सांस्कृतिक आदान-प्रदान के उद्देश्य से लगी प्रदर्शनी में पाकिस्तान से 40 सदस्यीय टीम आई है। आयोजन स्थल पर कुल 40 स्टाल लगाए गए हैं। जिनमें से 27 स्टाल पाकिस्तानी टीम के हैं। साड़ियों, सूट और कुर्तियों पर किए गए जरीवर्क, मिरर वर्क, तारकशी, क्रोशिया, सितारा वर्क, कच्चा टांका, मछली टांका, मकड़ी टांका से सजे ड्रेस मैटेरियल काफी खूबसूरत हैं। इसके साथ ही फूड कोर्ट में कराची के मो. आरिफ अहमद वारसी और मेराज अहमद के पाकिस्तानी व्यंजनों के साथ आए हैं। ओनेक्स स्टोन से बने सजावटी सामान और पेशावरी जूतियां भी काफी आकर्षक हैं। इसके साथ ही हैदराबाद, दिल्ली, इंदौर के बने फर्नीचर्स के साथ ही देश के विभिन्न शहरों के 35 कलाकारों ने भी स्टॉल लगाए हैं।
भारत में हमें वैसा ही प्यार, अपनापन और सम्मान मिलता है जितना हमें अपने मुल्क में मिलता है। सिर्फ भौगोलिक सीमा ही हमें अलग करती हैं वरना तो संस्कृति, सभ्यता, स्वाद सभी में हम एक जैसे ही हैं। इको पाक प्रदर्शनी में पाकिस्तान से अपने देश का प्रतिनिधित्व करने आए कारीगरों ने ‘अमर उजाला’ से अपने अनुभव साझा किए।
बहावलपुर से लेडीज कलेक्शन लेकर आईं महमूदा नदीम कहती हैं कि वह 20-25 बार भारत आ चुकी हैं। भारत के लोगों का अपनापन और प्यार ही है कि वह बार-बार यहां आती हैं। महमूदा कहती हैं कि सिर्फ लफ्ज का ही फर्क है वर्ना दिल तो सबके एक ही हैं। इस्लामाबाद से आईं हनीफा नजूल ने कहा कि भारत में उनका पांचवां चक्कर है। यहां अपने घर जैसा ही हमें महसूस होता है। बताया कि संगम के बारे में बहुत सुना था, इसलिए आते ही उन्होंने संगम देखा। मौका मिलने पर वह और भी जगह घूमने जाएंगी।
मुल्तान से आए अब्दुल रहमान ने कहा कि यहां के लोगों में जो अपनापन और प्यार है वह कहीं और नहीं मिलता है। यहां के लोग दिल और जुबान के तो मीठे हैं ही कला के पारखी और कद्रदान भी हैं। कराची से आए शफीक अहमद ने कहा कि कई बार भारत आकर हमें यहां के लोगों की पसंद पता चल गई है। इसलिए हम वही सब लेकर आते हैं जिसे पसंद किया जाए। यहां आकर दिल से खुशी होती है।