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कैदियों से काम कराकर नहीं किया भुगतान, फंसे अफसर

Thu, 29 Jan 2015 11:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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नैनी सेंट्रल जेल प्रशासन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निशाने पर आ गया है। दो कैदियों की शिकायत पर जेल में जांच करने पहुंचे आयोग के अफसरों को वहां तमाम खामियां मिलीं। साथ ही यह शिकायत भी सही पाई गई कि वह कैदियों से काम कराने के बाद उसके एवज में पारिश्रमिक का भुगतान नहीं किया जा रहा है। आयोग ने जेल में सुधार की जरूरत बताई है और इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजने का निर्णय लिया है।
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हालांकि जिन दो कैदियों की शिकायत पर आयोग के अफसर जेल में जांच करने पहुंचे थे, उन दोनों कैदियों को जेल से ट्रांसफर कर कहीं और भेज दिया गया है। कैदियों की शिकायत थी कि उनसे कराए गए कार्यों के पारिश्रमिक का भुगतान उनके खाते में नहीं भेजा रहा। पुराने मामलों में भी भुगतान में काफी विलंब किया गया। आयोग की टीम ने कैदियों से पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए तो शिकायत सही पाई गई। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत जरूरतों की कमी को लेकर भी शिकायत की गई थी।

आयोग के सदस्य एससी सिन्हा ने बताया कि जेल प्रशासन से मिले आंकड़ों के मुताबिक नैनी जेल में क्षमता से अधिक कैदी हैं, जिससे कैदियों को तमाम तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। इनमें से 31 कैदी मानसिक रोगी है जबकि तकरीबन 30 कैदी एचआईवी-एड्स से पीड़ित है। जहां तक डॉक्टरों और दवाओं की बात है, तो निरीक्षण के दौरान मौके पर तीनों डॉक्टर मौजूद थे और दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थीं। इस दौरान जो खामियां मिली हैं, उनसे संबंधित एक रिपोर्ट आयोग की तरफ से उत्तर प्रदेश शासन को भेजी जाएगी और जेल में सुधार के लिए सिफारिश भी की जाएगी।
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