फोटो नवाबगंज 02 तपिस में धान रोपाई में जूटे मजदूर
- फोटो : Archive
मौसम की बेरुखी ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। तेज धूप और पानी संकट से इलाके में धान की रोपाई का काम पिछड़ता जा रहा है। बिजली कटौती के बीच सूखी नहरों से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
नवाबगंज और कौड़िहार इलाके में रहने वाले तराई क्षेत्र के किसान चैतरफा मार झेल रहे हैं। क्षेत्र की कई नहरों में पिछले कई वर्षों से पानी नहीं आया है, जिसके चलते सिंचाई की निर्भरता अब नलकूपों पर आ टिकी है। यहां बिजली की कटौती किसानों के मंसूबों पर पानी फेर रही है। मौसम की मार से करीब 50 फीसदी धान की नर्सरी खेतों में ही झुलस कर बर्बाद हो गई है। बची हुई नर्सरी को बचाने के लिए किसान दिन-रात जद्दोजहद कर रहे हैं।
किसान श्याम लाल पटेल, ओम प्रकाश मौर्य और संजय उपाध्याय ने बताया कि नहरें कई साल से सूखी पड़ी हैं। ट्यूबवेल के भरोसे खेत भरते हैं, लेकिन पानी खेत के दूसरे छोर तक पहुंचने से पहले ही बिजली चली जाती है।
कांग्रेस नेता ने धान रोपाई कर जय जवान- जय किसान का बुलंद किया नारा
पीसीसी सदस्य आशीष पांडेय ने धान की रोपाई कर जय जवान, जय किसान का नारा बुलंद किया। उन्होंने खेतों में धान की रोपाई करते हुए किसानों से कहा कि अभी भी देश में 70 फीसदी लोग खेती पर निर्भर है। खेती से उत्पादित खाद्यान्न लोगों की मुख्य जीविका है।