आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में समाज के सामने चुनौतियां और बढ़ रही हैं। वर्तमान के डिजिटल युग में कंपनियां हमारा डाटा इकट्ठा कर गलत इस्तेमाल कर रही हैं। विधि व्यवसाय में एआई पर अधिक निर्भरता खतरनाक है।
यह बातें उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में मूट कोर्ट प्रतियोगिता के उद्घाटन पर कहीं। विधि संकाय की ओर से शनिवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता ‘विधि कुंभ : ज्ञान और कौशल समागम’ की शुरुआत की।
विवि परिसर स्थित प्रो. ईश्वर टोपा कॉम्प्लेक्स में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने कहा, देश के विभिन्न अदालतों में 5.20 करोड़ से अधिक केस पेंडिंग हैं। इससे पूरा देश प्रभावित हो रहा है। देश में 20 हजार ही जज हैं।
तकनीक का सही कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। कोर्ट में लाइव स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन वर्चुअल कोर्ट, ई-केस फिलिंग और वीडियो कांफ्रेंसिंग जैसी सुविधाएं नवीन तकनीक के इस्तेमाल करने के बाद ही मिल सकी हैं।
न्यायमूर्ति ने कहा, बदलते दौर में विद्यार्थियों के लिए विधि क्षेत्र में भविष्य निर्माण की अनेक संभावनाएं हैं। उन्होंने छात्रों को पुस्तकें पढ़ने की सलाह दी। विद्यार्थियों को मूट कोर्ट के साथ ही लॉ-ड्राफ्टिंग, जजमेंट राइटिंग, आर्गूमेंट लेखन के प्रैक्टिकल अभ्यास करवाने की जरूरत है।
मूट कोर्ट से विद्यार्थियों में समूह में कार्य करने की क्षमता विकसित होती है। विधि के विद्यार्थियों को लॉ फर्म जैसे समूह में कार्य पूरा करने के गुण को विकसित करना होगा। इविवि की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने कहा, वकील को संचार कौशल में निपुण होना चाहिए।
विधि संकाय के डीन प्रो. आदेश कुमार ने इविवि के गौरवशाली अतीत पर प्रकाश डाला। संचालन आयोजन सचिव डॉ. विजय लक्ष्मी सिंह व धन्यवाद ज्ञापन मूट कोर्ट सोसायटी की संयोजक डॉ. सोनल शंकर ने किया।
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विधि विभाग के पूर्व शिक्षक सम्मानित
कार्यक्रम में विधि संकाय के पूर्व शिक्षकों प्रो. एचओ अग्रवाल, प्रो. वीपी सिंह, प्रो. आरके खन्ना और प्रो. आरके चौबे को उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।