फूलपुर के बाबूगंज में सुरेश चंद्र के दरवाजे पर तीन वर्ष से खराब पड़ा हैंडपंप।
भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूगर्भ जलस्तर ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा दिया है। विकास खंड फूलपुर की 67 ग्राम पंचायतों में 3445 इंडिया मार्का हैंडपंप स्थापित हैं। इनमें से 200 से अधिक हैंडपंप खराब होकर बंद पड़े हैं।
गर्मी बढ़ने के साथ ही जलस्तर नीचे खिसकने से कई हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। मरम्मत और रखरखाव में देरी के कारण भी अनेक हैंडपंप लंबे समय से खराब हैं। ग्रामीणों को पानी भरने के लिए दूसरे मोहल्लों या दूर स्थित हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है। मैलहन, तिसौरा और पूरेसूदी जैसे गांवों में सुबह-शाम लंबी कतारें लगती हैं। ग्रामीणों ने खराब हैंडपंपों को शीघ्र ठीक कराने की मांग की है।
अवकाश प्राप्त अधिकारी हौसला प्रसाद मिश्र ने भूगर्भ जलस्तर रोकने पर जोर दिया। उन्होंने वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण के उपायों को बढ़ावा देने की बात कही। गांवों में वर्षा जल का अधिक संचयन कर भूजल पुनर्भरण किया जाए। इससे जलस्तर में सुधार संभव है और हैंडपंपों के सूखने की समस्या कम हो सकती है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, लगभग हर ग्राम पंचायत में चार से पांच इंडिया मार्का हैंडपंप खराब हैं। कहीं मशीनरी खराब है तो कहीं जलस्तर नीचे जाने से पानी नहीं निकल रहा। विभाग का दावा है कि शिकायत मिलने पर खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराई जा रही है। जलस्तर प्रभावित क्षेत्रों में रिबोरिंग की कार्रवाई भी शुरू की जा रही है। हैंडपंपों की मरम्मत और रिबोर का कार्य ग्राम निधि से होता है।
फूलपुर में कुल 3445 हैंड पंप क्रियाशील हैं। 40 मरम्मत योग्य एवं 18 हैंडपंप का रिबोर होना है। खराब हैंडपंपों की सूची तैयार कर मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है। जहां तकनीकी खराबी है, वहां तत्काल मरम्मत की जा रही है, जबकि जलस्तर प्रभावित क्षेत्रों में रिबोरिंग की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। - राजेश सिंह, सहायक विकास अधिकारी पंचायत, फूलपुर ।