उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने कहा कि कोरोना काल में अदालतों का काम सीमित था। इसलिए उस दौरान बिना दोनों पक्षकार को सुने दिया गया फैसला सही नहीं माना जा सकता। यह आदेश परिषद के सदस्य (न्यायिक) ओम प्रकाश आर्य ने रवि शंकर की ओर से जमीन बंटवारे को लेकर दायर वाद की सुनवाई करते हुए दिया।
उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने कहा कि कोरोना काल में अदालतों का काम सीमित था। इसलिए उस दौरान बिना दोनों पक्षकार को सुने दिया गया फैसला सही नहीं माना जा सकता। यह आदेश परिषद के सदस्य (न्यायिक) ओम प्रकाश आर्य ने रवि शंकर की ओर से जमीन बंटवारे को लेकर दायर वाद की सुनवाई करते हुए दिया।
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मामला जौनपुर के मड़ियाहूं तहसील का है। रवि शंकर ने आरोप लगाया था कि नगीना देवी ने रजिस्टर्ड बैनामे के आधार पर अपना नाम सरकारी रिकॉर्ड (खतौनी) में दर्ज कराया। फिर जमीन के बंटवारे के लिए केस दाखिल किया। इस पर मड़ियाहूं के उपजिलाधिकारी ने चार जनवरी 2021 को बिना दूसरे पक्ष को सुने ही एकतरफा फैसला दे दिया और नगीना देवी का आधा हिस्सा तय कर दिया।
याची के अधिवक्ता ने दलील कि उन्हें न तो सही तरीके से सूचना (नोटिस) मिली और न ही बात रखने का मौका दिया गया। जिस बैनामे के आधार पर नाम दर्ज हुआ है, वह गलत तरीके से बना है। उसे रद्द कराने का मामला सिविल कोर्ट में चल रहा है।
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परिषद ने कहा कि नोटिस की बात तो लिखी गई पर यह नहीं बताया गया कि चस्पा कब हुआ। साथ ही मार्च 2020 से देश में कोरोना के कारण लॉकडाउन था। अदालतों का कामकाज सीमित था, एकतरफा फैसला कर दिया गया।