इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कोरोना महामारी के कारण प्रशासनिक कामों में देरी हो सकती है, मगर इसकी आड़ में कोर्ट के आदेश को लटकाया नहीं जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि संविधान द्वारा स्थापित कानून अस्तित्व में है तो कानून का शासन ही प्रभावी होगा।
कानून रुक नहीं सकता और न ही कोर्ट चुप रह सकती है। हाईकोर्ट ने मेडिकल बिना के भुगतान के एक मामले में मथुरा के एसएसपी शलभ माथुर को 13 अगस्त तक आदेश के अनुपालन की जानकारी देने एवं अभी तक पालन न करने के कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि एसएसपी आदेश का पालन नहीं करते हैं तो उनको वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समझ उपस्थित होना होगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने मथुरा की चंद्र सखी की अवमानना याचिका पर दिया है। कोर्ट ने याची द्वारा चिकित्सा खर्च बिल जमा करने पर उसका बिल 26 मार्च 20 तक नियमानुसार पास करने का निर्देश दिया था।
इस आदेश का पालन नहीं किया गया तो याची ने अवमानना याचिका दाखिल की। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण मांगी गई जानकारी नहीं मिल सकी है। कोर्ट ने कहा कि यह संतोषजनक उत्तर नहीं है। एसएसपी को दो बार मौका दिया गया इसके बावजूद आदेश के पालन की कोई जानकारी नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि कोविड 19 के प्रकोप के कारण देरी हो सकती है। किंतु यह भी सच है कि अधिकारियों द्वारा आदेश के पालन में लापरवाही बरती जा रही है। पेन्डेमिक के चलते इसकी माफी नहीं दी जा सकती। एसएसपी का जानकारी न देने का आचरण प्रथम दृष्टया कोर्ट आदेश की अवहेलना है। सरकारी अधिवक्ता के अनुरोध पर आदेश का पूर्णतया पालन करने का एक मौका दिया जा रहा है।