पुनर्मतगणना के आदेश की जानकारी होने पर याची विजेता प्रधान सुमन देवी नें पुनर्मतगणना रोकने के लिए प्रत्यावेदन दिया लेकिन उसका निस्तारण नहीं किया गया। जिससे क्षुब्द विजेता प्रधान सुमन देवी ने उच्च न्यायालय में पुर्नमतगणना के आदेश को चुनौती दी।
याची की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता सुनील कुमार ने बताया कि चुनाव याचिका की नोटिस याची को बिना तामील कराये ही चुनाव याचिका की सुनवाई की गयी और बिना किसी ठोस साक्ष्यों के पुनर्मतगणना का आदेश दिया गया जो उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा स्थापित विधि व्यवस्थाओं के विरूद्घ है। सभी वाद बिन्दु चुनाव याची के विरूद्घ तय होने के बावजूद पुर्नमतगणना का आदेश बिना न्यायिक विवेक का प्रयोग करते हुए पारित किया गया है।
विपक्षी विनय कुमार की ओर से अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने बहस की। दोनो पक्षों की बहस और उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने उपजिलाधिकारी सिरसा गंज के पुर्नमतगणना के आदेश को निरस्त कर दिया और जिलाधिकारी फिरोजाबाद को निर्देशित किया कि पंचायत राज अधिनियम के तहत चुनाव याचिकाओं के निस्तारण की कार्यवाही से अनभिज्ञ उपजिलाधिकारी सिरसागंज को तत्काल ट्रेनिंग पर भेजे। न्यायालय ने इस आदेश को शासन को भी प्रेषित करने का आदेश दिया है।