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हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी : पुनर्मतगणना का आदेश निरस्त, चुनाव याचिका निस्तारण के गुर सीखें एसडीएम

Sat, 10 Jun 2023 07:24 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह तल्ख टिप्पणी उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने जिला फिरोजाबाद के गा्रम भरौल की गा्रम प्रधान सुमन देवी की ओर से दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए की। याची प्रधान सुमन देवी ने उपविजेता की चुनाव याचिका पर सक्षम प्रधिकारी द्वारा पुर्नमतगणना के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उपजिलाधिकारी सिरसागंज को चुनाव याचिकाओं के निस्तारण के गुर सीखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी के सााथ कहा कि पंचायत राज अधिनियम के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी के रूप में कार्यवाही संचालित करने प्रक्रिया से उपजिलाधिकारी अनभिज्ञ हैं।

यह तल्ख टिप्पणी उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने जिला फिरोजाबाद के ग्राम भरौल की ग्राम प्रधान सुमन देवी की ओर से दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए की। याची प्रधान सुमन देवी ने उपविजेता की चुनाव याचिका पर सक्षम प्रधिकारी द्वारा पुनर्मतगणना के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।मामला फिरोजाबाद के ग्राम भारौल के प्रधान चुनाव का है। अप्रैल 2021 में हुए गा्रम प्रधान के चुनाव में कुल 11 प्रत्याशी थे। 2 मई को हुयी मतगणना में याची सुमन देवी 8 मतों से विजयी घोषित की गयी। चुनाव परिणाम को उपविजेता विनय कुमार ने सक्षम प्रधिकारी उपजिलाधिकारी के समक्ष चुनाव याचिका दाखिल कर पुर्नमतगणना की मॉग की थी।

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चुनाव याचिका पर सक्षम प्राधिकारी ने ८ वाद बिन्दु बनाये और ठोस साक्ष्यो के अभाव में सभी वाद बिन्दु उपविजेता के विरूद्घ तय हुए, लेकिन उपविजेता और अन्य औपचारिक प्रतिवादियों के अनापत्ति पर उपजिलाधिकारी ने दो जून को पुर्नमतगना का आदेश पारित कर दिया।

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पुनर्मतगणना के आदेश की जानकारी होने पर याची विजेता प्रधान सुमन देवी नें पुनर्मतगणना रोकने के लिए प्रत्यावेदन दिया लेकिन उसका निस्तारण नहीं किया गया। जिससे क्षुब्द विजेता प्रधान सुमन देवी ने उच्च न्यायालय में पुर्नमतगणना के आदेश को चुनौती दी।

याची की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता सुनील कुमार ने बताया कि चुनाव याचिका की नोटिस याची को बिना तामील कराये ही चुनाव याचिका की सुनवाई की गयी और बिना किसी ठोस साक्ष्यों के पुनर्मतगणना का आदेश दिया गया जो उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा स्थापित विधि व्यवस्थाओं के विरूद्घ है। सभी वाद बिन्दु चुनाव याची के विरूद्घ तय होने के बावजूद पुर्नमतगणना का आदेश बिना न्यायिक विवेक का प्रयोग करते हुए पारित किया गया है।

विपक्षी विनय कुमार की ओर से अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने बहस की। दोनो पक्षों की बहस और उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने उपजिलाधिकारी सिरसा गंज के पुर्नमतगणना के आदेश को निरस्त कर दिया और जिलाधिकारी फिरोजाबाद को निर्देशित किया कि पंचायत राज अधिनियम के तहत चुनाव याचिकाओं के निस्तारण की कार्यवाही से अनभिज्ञ उपजिलाधिकारी सिरसागंज को तत्काल ट्रेनिंग पर भेजे। न्यायालय ने इस आदेश को शासन को भी प्रेषित करने का आदेश दिया है।

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