इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (शुआट्स) की ओर से कोर्स बंद करने और शिक्षकों की सेवा समाप्ति के आदेश को सही माना है। शुआट्स को आदेश दिया है कि वह तीन सप्ताह के भीतर शासन के समक्ष अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे। साथ ही न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने राज्य सरकार को भी तीन सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।
विवि की ओर से कहा गया कि चार–पांच साल में स्ववित्तपोषित इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या 90 प्रतिशत तक घटने से आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया। विभिन्न समितियों की रिपोर्ट, अकादमिक काउंसिल, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट और बाद में सीनेट की स्वीकृति के बाद मार्च 2025 में कुछ स्ववित्तपोषित इंजीनियरिंग विभागों को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। इसके परिणामस्वरूप एक जुलाई 2025 से संबंधित प्रोफेसरों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
प्रोफेसरों की ओर से दलील दी गई कि पाठ्यक्रम समाप्त करने की प्रक्रिया विधिसम्मत ढंग से नहीं अपनाई गई। सीनेट ने स्वतंत्र निर्णय लेने के बजाय केवल रिपोर्टों पर मुहर लगाई। विवि समग्र रूप से लाभ में है। इसलिए अन्य पाठ्यक्रमों के लाभ से वेतन का भुगतान किया जा सकता था।