लोक व्यवस्था बनाना जरूरी
अदालत ने अपने 54 पन्नों के फैसले में कहा कि जब कोई कृत्य अपनी प्रकृति में इतना क्रूर हो और उसका समय इतना सटीक हो कि वह एक बड़े समुदाय की धार्मिक भावनाओं को उनके सबसे पवित्र क्षणों में आहत करे तो वह लोक व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने की क्षमता रखता है। ऐसे में शरारती तत्वों की हिरासत न सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई है, बल्कि सामाजिक सद्भाव को बचाने का कर्तव्य बन जाता है।
इवेन टेम्पो ऑफ लाइफ का सिद्धांत
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए इवेन टेम्पो ऑफ लाइफ (जीवन का सामान्य प्रवाह) का जिक्र किया। कहा कि यदि किसी कृत्य से समाज का सामान्य प्रवाह रुक जाए और लोग असुरक्षित महसूस करने लगें तो वह लॉ एंड ऑर्डर की परिधि से बाहर निकलकर पब्लिक ऑर्डर का मामला बन जाता है।