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Operation Sindoor:हर पल मदद के लिए मौजूद होंगे नागरिक सुरक्षा के वार्डन, युद्ध के दौरान बढ़ जाती है जिम्मेदारी

Sat, 10 May 2025 04:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

महाकुंभ एवं माघ मेला का आयोजन हो या फिर बाढ़ में राहत कार्य पीली जैकेट पहने सिविल डिफेंस के सदस्य आपको हर जगह दिख जाएंगे। युद्ध के दौरान तो इनकी भूमिका और बढ़ जाती है।
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सिविल डिफेंस। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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महाकुंभ एवं माघ मेला का आयोजन हो या फिर बाढ़ में राहत कार्य पीली जैकेट पहने सिविल डिफेंस के सदस्य आपको हर जगह दिख जाएंगे। युद्ध के दौरान तो इनकी भूमिका और बढ़ जाती है। तनाव वाले माहौल में कोर के वार्डन नागरिकों को जागरूक करने एवं सुरक्षा प्रदान करने के साथ उनका हौसला बढ़ाकर मनोवैज्ञानिक युद्ध भी लड़ते हैं।

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इनकी इन्हीं भूमिकाओं को देखते हुए सीमा पर तैनात सैनिकों की तरह ही वार्डन सेवा को भी महत्व दिया जाता है। युद्ध से पहले तथा दौरान इनकी भूमिका को इससे ही समझा जा सकता है कि पाकिस्तान में आतंकी अड्डों के ध्वस्त करने के बाद तनाव बढ़ते ही सिविल डिफेंस को अलर्ट कर दिया गया और मॉक ड्रिल एवं ब्लैक आउट जैसे अभियान उनकी अगुवाई में शुरू कर दिए गए हैं। इसमें प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन, चिकित्सा के लोग भी शामिल हैं।

पूरे शहर में फैला है जाल

सिविल डिफेंस के दो महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं। एक प्रशासनिक विंग जिसके नियंत्रक डीएम होते हैं। इनके नीचे उप नियंत्रक, सहायक उप नियंत्रक होते हैं। प्रयागराज शहर को पांच डिवीजन में बांटा गया है। हर डिवीजन में एक-एक सहायक उप नियंत्रक तथा उनके सहयोग में एक और अफसर की नियुक्ति की जाती है। इस तरह से यहां सहायक उप नियंत्रक के 10 पद हैं लेकिन तैनाती एक की ही है।
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वहीं, दूसरा और महत्वपूर्ण विंग है वार्डन सेवा। इसमें सामाजिक सेवा के भाव से लोग शामिल होते हैं। इनके मुखिया चीफ वार्डन होते हैं, जो इस समय अनिल गुप्ता हैं। इनके नीचे पांच डिवीजन वार्डन और हर डिवीजन में 10-10 पोस्ट वार्डन होते हैं। हर पोस्ट में 10-10 सेक्टर वार्डन होते हैं।

इनके अलावा डिवीजन में अग्निशमन फाइटर होते हैं। ये वार्डन एवं अग्निशमन फाइटर ही सिविल डिफेंस के आधार हैं। ये समाज से जुड़े लोग होते हैं। ऐसे में इनकी करीब हर घर तक पहुंच होती है। वार्डन सेवा के हर सदस्य को आग से बचाव, हमले के दौरान बचाव कार्य आदि का प्रशिक्षण प्राप्त होता है।

समय-समय पर इन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। यही वजह है कि युद्ध की स्थिति में जागरूकता फैलाने, ब्लैक आउट एवं शासन की गाइडलाइन का पालन कराने, हमले के बाद रिस्क्यू ऑपरेशन आदि में इनकी बड़ी भूमिका होती है।

सिविल डिफेंस के पास हैं नौ सायरन

सीमा पर सिविल डिफेंस ऑफिसर होता है। यदि कोई जहाज, ड्रोन या मिसाइल सीमा में प्रवेश करती है तो वहां तैनात ऑफिसर तत्काल अलर्ट रीजनल सिविल डिफेंस कंट्रोल सेंटर को भेजता है। रीजनल सेंटर सेंटर से अलर्ट टाउन सिविल डिफेंस कंट्रोल सेंटर को भेजा जाता है। प्रयागराज टाउन सेंटर है और इसका रीजनल सेंटर लखनऊ है। किसी तरह के हमले को लेकर अलर्ट लखनऊ सेंटर से होते हुए यहां आता है। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ सेकंड लगते हैं। इसके बाद सिविल डिफेंस के सदस्य सक्रिय हो जाते हैं। इसी क्रम में युद्ध का सायरन बजाया जाता है।

यहां सिविल डिफेंस के पास तीन इलेक्टिक सायरन हैं, वहीं छह हैंड सायरन हैं। इनके अलावा रेलवे, कारखानों में भी हूटर होते हैं। इन्हें भी बजाया जाता है। इनके अलावा वार्डन सेवा से जुड़े लोगों के पास सीटी होती है और गलियों में जाकर लोगों को युद्ध के खतरे के प्रति सतर्क करते हैं। ब्लैक आउट होने की स्थिति में घर-घर जाकर लोगों से बिजली, टार्च आदि बंद करने की अपील करते हैं। लोगों को शेल्टर होम या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में भी मदद करते हैं। हमला होने की स्थिति में अग्निशमन, स्वास्थ्य, पुलिस विभाग की टीम का सहयोग करते हैं।

लोगों को एंबुलेंस, जरूरत पड़ने पर खाद्यान्न समेत अन्य जरूरी वस्तुएं पहुंचाने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा डीएम की ओर से जारी हर निर्देश का पालन सुनिश्चित कराने की भी उन पर जिम्मेदारी होती है।

शुरू हुई भर्ती

सिविल डिफेंस के करीब आठ हजार सदस्य हैं। इनमें से दो हजार सक्रिय सदस्य हैं। इनमें से वार्डन सेवा के 700 सक्रिय सदस्य हैं। मानक के अनुसार, हर पांच घर पर एक सदस्य होना चाहिए। ऐसे में वार्डन सेवा एवं अग्निशमन फाइटर के बड़ी संख्या में पद खाली हैं। शुक्रवार को इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई। सहायक उप नियंत्रक राकेश तिवारी ने बताया कि इसके लिए फार्म भरना होगा। आसपास के वार्डन की मदद से आवेदन किए जा सकते हैं।

आर्य कन्या इंटर कॉलेज में मॉक ड्रिल

सिविल डिफेंस की ओर से शुक्रवार को आर्य कन्या इंटर कॉलेज परिसर में मॉक ड्रिल हुई। इस दौरान इंटर कॉलेज के अलावा डिग्री कॉलेज की स्नातक एवं विधि की छात्राएं भी मौजूद रहीं। इसमें सायरन बजने, ब्लैक आउट, इस दौरान बरती जाने वाली सतर्कता, हमले के बाद रेस्कयू ऑपरेशन आदि का अभ्यास किया गया। उप नियंत्रक नीरज मिश्रा ने बताया, शनिवार को फाफामऊ स्थित गंगा गुरुकुलम में मॉक ड्रिल होगी।
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सिविल डिफेंस के प्रमुख कार्य

- हमले का अलर्ट होते ही सायरन बजाना
- गलियों में जाकर सीटी के माध्यम से युद्ध के खतरे के प्रति सतर्क करना
- लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद
- शेल्टर हाउस, प्रशिक्षण केंद्र आदि के बारे में बताना और पहुंचने में मदद करना
- जर्जर भवन में रहने वालों को वहां से निकालना और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना
- ब्लैक आउट की स्थिति में घर-घर जाकर बिजली-टार्च आदि बंद कराना
- सायरन और ब्लैक आउट की बाबत जारी गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित कराना
- बंदी की स्थिति में खाद्यान्न आदि जरूरी वस्तुएं उपलब्ध कराना
- हमला हो जाने पर रेस्कयू ऑपरेशन में एजेंसियों का सहयोग करना
- लोगों को एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, अस्पताल आदि के नंबर उपलब्ध एवं राहत सुनिश्चित कराना
डीएम की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित कराना

हम सीमा से काफी दूर है। इस दृष्टि से प्रयागराज बी श्रेणी में आता है। ऐसे में एयर क्राफ्ट, ड्रोन या मिसाइल के यहां गिरने की कम आशंका है। यदि हमला हो भी जाता है तो अलर्ट जारी होने के बाद मिसाइल या जहाज के यहां पहुंचने में समय लगेगा। तब तक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना हमारा लक्ष्य होगा। - नीरज मिश्रा, उप नियंत्रक
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