यमुनापार के दक्षिण में स्थित बारा के पहाड़ी इलाके में धरा गांव। दोपहर दो बजे का वक्त। अमर उजाला टीम को एक वाशिंग प्लांट के बाहर पांच ट्रक खडे़ दिखे। एक ट्रक प्लांट के अंदर था जिस पर मजदूर सिलिका सैंड लादने में जुटे थे। तकरीन तीन घंटे में सभी छह ट्रक सिलिका सैंड लादकर रवाना हो गए। शाम लगभग पांच बजे शंकरगढ़ के शिवराजपुर में भी वाशिंग प्लांट में ट्रकों में मजदूर सिलिका सैंड लादते दिखे। बाहर खनन माफिया की फारच्यूनर गाड़ी खड़ी थी।
सिलिका सैंड खनन माफियाओं के लिए सफेद खजाना की तरह है। अदालत से रोक के बावजूद इलाहाबाद के पाठा इलाके में खनन और लदाई खुलेआम हो रही है। हाईकोर्ट से पाबंदी है लेकिन बारा तहसील के शंकरगढ़, बारा, लालापुर इलाके में एक भी दिन न तो खनन रुका और न सिलिका सैंड की ट्रकों में ढुलाई। खनन माफिया के साथ ही क्षेत्रीय थानों की पुलिस और संबंधित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मोटी रकम जेब में भर रहे है। सच तो यह है कि मिलीभगत के चलते खनन माफिया को पुलिस-प्रशासन से कोई भय नहीं है। रात-दिन सिलिका सैंड लादकर ट्रक पुलिसवालों के सामने गुजरते रहते हैं। मगर सभी खनन माफियाओं से महीना बंधा होने के अलावा रोज हर ट्रक से पांच सौ से दो सौ रुपये की वसूली होने की वजह से पुलिस अवैध खनन और ढुलाई पर रोक लगाने की सोचती भी नहीं है।
लालापुर क्षेत्र के चिल्ला, बसहरा, धरा, गोल्हैया, मदनपुर बघला और शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के कचरी, गढ़वा, शिवराजपुर, लखनपुर, बिहरिया, आमगोंदर, छिपिया, कपारी सहित दर्जनों स्थानों पर सिलिका सैंड की अवैध खनन हो रही है। इन तीन इलाकों में 80 से ज्यादा वाशिंग प्लांट में सिलिका सैंड को धुला जाता है। फिर ट्रकों में लादकर गुजरात के अलावा हैदराबाद, बंगलुरू समेत उन जनपदों को भेजा जाता है जहां फैक्टियों में सिलिका सैंड से कांच बनाने का काम होता है। इलाहाबाद के पाठा में पत्तर तोड़कर निकाली जाने वाली सिलिका सैंड एशिया में सबसे बेहतर मानी गई है। यहां से निकलने वाली सिलिका में आयरन की मात्रा नाम मात्र की होती है जिससे महंगी गाड़ियों के कांच समेत अन्य सामान तैयार किए जाते हैं। इसलिए हाईकोर्ट से रोक के बावजूद खनन माफिया खुलेआम सफेद खजाना लूट रहे हैं।
बारा तहसील पहाड़ी इलाके से रोज अवैध खनन के जरिए दो करोड़ रुपये से ज्यादा का खेल हो रहा है। खनन से जुड़े लोगों के मुताबिक, 80 से ज्यादा वाशिंग प्लांट से रोज तकरीबन 300 ट्रकों में सिलिका लैंड लादकर दूसरे राज्यों को भेजी जा रही है। एक ट्रक सिलिका सैंड की अनुमानित कीमत लगभग 80 हजार है। कुछ साल पहले खनन के चलते ही इलाहाबाद को सबसे ज्यादा राजस्व वाला जिला माना गया था लेकिन अब अवैध खनन से माफिया राजस्व को चपत लगा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि कुछ खनन माफिया ने डंप बालू को बेचने का लाइसेंस बनवा लिया और उसकी आड़ में रात-दिन अवैध खनन कराकर जेब भरी जा रही है। अवैध खनन के लिए बदनाम शंकरगढ़ का ज्यादातर हिस्सा मध्य प्रदेश और चित्रकूट जनपद से सटा है। माफिया सिलिका सैंड लदी गाड़ियों को मिनटों में ही मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश करा देते है। दूसरे जिले में प्रवेश करते ही बालू माफियाओं की ड्यूटी खत्म हो जाती है। यूं माफिया रोज लाखों रूपए राजस्व का चूना लगा रहे हैं।
पाठा इलाके में पानी की भारी किल्लत हैं। लोगों को पीने के पानी की खातिर कई किलोमीटर तक भटकना पड़ता है मगर इस सूखे के बीच शंकरगढ़, बारा, लालापुर के दर्जनों वाशिंग प्लांट में रोज सिलिका सैंड धोने में लाखों लीटर पानी की बर्बादी हो रही है। इसी वजह से इलाके में गर्मी से पहले ही पानी का अकाल हो जाता है।
सिलिका सैंड के अवैध खनन से जहां पर्यावरण को भारी क्षति पहुंच रही हैं वहीं अक्सर हो रहे हादसों में लोगों की जान जा रही है। शिवराजपुर-प्रतापपुर मार्ग और बांदा मार्ग किनारे अवैध वाशिंग प्लांट बनाकर सिलिका का भंडारण किया गया है। सड़क पर फैले सिलिका से बड़े वाहनों के गुजरने से धूल उड़ती है जबकि छोटी गाड़ियां सिलिका सैंड की वजह से फिसलते हैं। प्रतापपुर मार्ग पर भैंसहाई मोड़ के पास लगभग आठ माह पहले सिलिका सैंड पर बाइक फिसलने से एक महिला की मौत हो गई। शिवराजपुर-बांदा मार्ग पर सड़क किनारे स्थित एक वाशिंग प्लांट पर दो माह पहले हुए हादसे में भाई-बहन के हाथ-पैर कट गए थे।। सड़क पर डंप बालू तथा वाशिंग प्लांट में कन्वेयर मशीन से हवा में धूल उड़ती है जो ग्रामीणों और मजदूरों के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो रही है।
-लालापुर से आशीष मिश्रा का इनपुट।
फोटो है-
संख्या 06- शिवराजपुर में बनी अवैध वाशिंग प्लांट।
संख्या 07 - ट्रक से उतरता बालू।