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Prayagraj News: एसटीएफ को दिए फुटेज में पेपर लीक कराने वाला ही हिस्सा गायब

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आरओ/एआरओ पेपर लीक प्रकरण की जांच में जुटी एसटीएफ को एक और चाैंकाने वाली बात पता चली है। मालूम हुआ है कि घटना के दिन का जो सीसीटीवी फुटेज उसे सौंपा गया, उसमें से पेपर लीक कराए जाने के दौरान का सीन ही गायब है। इससे फुटेज से छेड़छाड़ की भी आशंका जताई जाने लगी है। फिलहाल, ऐसे ही कई सवालों के जवाब ढूंढ़ने के लिए स्कूल की प्रिंसिपल को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है।
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आरओ/एआरओ पेपर लीक प्रकरण में उप्र लोक सेवा आयोग के सचिव की ओर से सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। बाद में विवेचना एसटीएफ को सौंप दी गई। एसटीएफ ने अब तक इस प्रकरण में जेल भेजे गए 14 लोगों में से कुछ का रिमांड बनवा लिया है, जबकि अन्य के संबंध में बी वारंट तामील कराकर तलबी की अर्जी दी है।
सूत्रों के मुताबिक विवेचना में जुटी एसटीएफ की टीम के सामने रोजाना नए तथ्य सामने आ रहे हैं। ऐसी ही एक चौंकाने वाली बात तब सामने आई, जब पुलिस ने बिशप जॉनसन गर्ल्स स्कूल कटरा का घटना वाले दिन यानी 11 फरवरी 2024 का सीसीटीवी फुटेज चेक किया। इसमें स्कूल में उस दिन की अन्य गतिविधियों की रिकॉर्डिंग है, लेकिन स्ट्रॉन्ग रूम में ले जाने से पहले पेपर स्कूल के एक अन्य कमरे में ले जाने के सीन वाला हिस्सा गायब है। जबकि, इस मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए केंद्र व्यवस्थापक अर्पित विनीत यशवंत और झूंसी निवासी स्कूल प्रबंधक कमलेश पाल ने पूछताछ में बताया था कि घटना वाले दिन कॉलेज में प्रश्नपत्र पहुंचने के बाद अर्पित की मदद से वह न सिर्फ भीतर गया, बल्कि प्रश्नपत्र का एक बंडल अपने हाथों में थाम लिया। इसके बाद उसे स्ट्रॉन्ग रूम में ले जाने के दौरान ही बगल में मेडिकल रूम में लेकर गया और फिर सील खोलकर मोबाइल से फोटो खींच ली। बाद में इस तस्वीर को लखनऊ में बैठे डॉ.शरद सिंह व अपने अन्य साथियों को भेजा।
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फुटेज से एक हिस्सा गायब होने से अब इससे छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है। इससे इस मामले में स्कूल प्रबंधन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। फिलहाल, एसटीएफ ने ऐसे ही कई सवालों के जवाब ढूंढ़ने के लिए कॉलेज की प्रिंसिपल को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है।

पहले भी कई परीक्षाएं करा चुका था अर्पित
सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ की जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया है। पेपर लीक कराने का आरोपी अर्पित बतौर केंद्र व्यवस्थापक आरओ/एआरओ से पहले भी परीक्षाएं आयोजित करा चुका था। खास बात यह कि वह स्कूल का नियमित कर्मचारी नहीं था। इसके बावजूद उसे परीक्षाओं में केंद्र व्यवस्थापक जैसी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। इस संबंध में प्रबंधन ने क्यों आंखें मूंदे रखीं और नियमों का पालन नहीं किया, एसटीएफ इसका भी जवाब ढूंढ़ने में लगी है।
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