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Prayagraj : 52 दिन में सिर्फ 761 घनमीटर साल स्लीपर की पासिंग,आने हैं 9350 क्यूबिक मीटर

Sun, 01 Sep 2024 01:23 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने के अनुमान के बीच गंगा पर पांटून पुलों के निर्माण के लिए रायपुर से मंगाए जाने वाले साल स्लीपर की धीमी गति ने अफसरों की पेशानी पर बल डालना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि मेला प्रशासन ने जल्द खामियों को दूर नहीं किया तो मुश्किलें बढ़ने से इन्कार नहीं किया जा सकता। ऐसे में अब सिर्फ 66 दिन शेष बचे हैं।
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महाकुंभ में पांटून ब्रिज निर्माण के लिए मंगाए गए साल स्लीपर। - फोटो : अमर उजाला।
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महाकुंभ की कई अहम परियोजनाएं इस बार समय रहते पूरी हो पाएंगी, इसे लेकर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं। कई परियोजनाएं या तो निरस्त हो चुकी हैं या फिर अफसर उन्हें समय से पूरा करने में हाथ खड़े कर चुके हैं। कमोबेश यह हाल इस बार अस्थाई कार्यों का भी है। 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने के अनुमान के बीच गंगा पर पांटून पुलों के निर्माण के लिए रायपुर से मंगाए जाने वाले साल स्लीपर की धीमी गति ने अफसरों की पेशानी पर बल डालना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि मेला प्रशासन ने जल्द खामियों को दूर नहीं किया तो मुश्किलें बढ़ने से इन्कार नहीं किया जा सकता। ऐसे में अब सिर्फ 66 दिन शेष बचे हैं। इस अवधि में 8600 साल स्लीपर की आपूर्ति करनी होगी।

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तीन बार तिथियां तय होने के बाद भी पांटून पुलों के टेंडर पुरानी दरों के विवाद की वजह से नहीं हो सके हैं। गंगा पर बनने वाले 30 पांटून पुलों के लिए 89 हजार साल स्लीपर रायपुर से मंगाए जाने हैं। इसके लिए जिन टिंबर कंपनियों को वर्क आर्डर दिया गया है, वह पासिंग में मानक विहीन स्लीपर पाए जाने और भंडारण की कमी की वजह से सवालों के घेरे में आ चुकी हैं। हालत यह है कि साल स्लीपर की पासिंग शनिवार तक 52 दिनों में सिर्फ 761 घन मीटर हो सकी है। जबकि पांटून पुलों के निर्माण के लिए9,350 हजार घनमीटर साल स्लीपर की आपूर्ति होनी है।

इस बीच प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात ने साल स्लीपर की धीमी आपूर्ति पर अफसरों से जानकारी मांगी है। साथ ही गड़बड़ी करने वाले एई-जेई की सूची भी तलब की है। इधर, अब तक जिस तरह की लकड़ी की आपूर्ति शुरू हुई है, उसे लेकर पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं और पासिंग कमेटी के सदस्यों बीच चर्चाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। टेंडर बांड के अनुसार छह नवंबर तक आपूर्ति पूरी कर देनी है। इस हिसाब से देखा जाए तो प्रतिदिन अगर 11सौ साल स्लीपर की आपूर्ति होगी तब यह लक्ष्य पूरा हो सकेगा।
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फिलहाल इस गति को बेहद सुस्त और चिंताजनक माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि पासिंग कमेटी के सदस्यों के तय मानक और शर्तों का पालन करने पर अड़े होने की वजह से मिल संचालक उन्हें या तो स्लीपर दिखा नहीं रहे हैं या फिर दिखाने पर रिजेक्ट हो जा रहे हैं। ऐसे में एसई और एक्सईएन ने तय किए गए नए मानकों के आधार पर अब पासिंग करने के लिए कहा है, ताकि स्थिति संभाली जा सके।

इस बार जिन फर्मों को साल स्लीपर की आपूर्ति का ठेका दिया गया है उनमें धोरमनाथ ट्रेडर्स, अनमोल टिंबर, नथानी टिंबर, धोरमनाथ ट्रेडिंग कंपनी और केएन पटेल कंपनी शामिल हैं। पासिंग में तेजी लाने के लिए पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता एके द्विवेदी ने इस बार दो टीमें एक साथ रायपुर के लिए रवाना की है। यह चौथी और आखिरी विशेषज्ञ कमेटी है। इस कमेटी पर 10 दिन के भीतर पासिंग पूरा करने की चुनौती है। ऐसे में नतीजा क्या होगा, कहा नहीं जा सकता। मुख्य अभियंता का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। काम समयबद्ध तरीके से पूरा करा लिया जाएगा।
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