इस बीच प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात ने साल स्लीपर की धीमी आपूर्ति पर अफसरों से जानकारी मांगी है। साथ ही गड़बड़ी करने वाले एई-जेई की सूची भी तलब की है। इधर, अब तक जिस तरह की लकड़ी की आपूर्ति शुरू हुई है, उसे लेकर पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं और पासिंग कमेटी के सदस्यों बीच चर्चाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। टेंडर बांड के अनुसार छह नवंबर तक आपूर्ति पूरी कर देनी है। इस हिसाब से देखा जाए तो प्रतिदिन अगर 11सौ साल स्लीपर की आपूर्ति होगी तब यह लक्ष्य पूरा हो सकेगा।
फिलहाल इस गति को बेहद सुस्त और चिंताजनक माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि पासिंग कमेटी के सदस्यों के तय मानक और शर्तों का पालन करने पर अड़े होने की वजह से मिल संचालक उन्हें या तो स्लीपर दिखा नहीं रहे हैं या फिर दिखाने पर रिजेक्ट हो जा रहे हैं। ऐसे में एसई और एक्सईएन ने तय किए गए नए मानकों के आधार पर अब पासिंग करने के लिए कहा है, ताकि स्थिति संभाली जा सके।
इस बार जिन फर्मों को साल स्लीपर की आपूर्ति का ठेका दिया गया है उनमें धोरमनाथ ट्रेडर्स, अनमोल टिंबर, नथानी टिंबर, धोरमनाथ ट्रेडिंग कंपनी और केएन पटेल कंपनी शामिल हैं। पासिंग में तेजी लाने के लिए पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता एके द्विवेदी ने इस बार दो टीमें एक साथ रायपुर के लिए रवाना की है। यह चौथी और आखिरी विशेषज्ञ कमेटी है। इस कमेटी पर 10 दिन के भीतर पासिंग पूरा करने की चुनौती है। ऐसे में नतीजा क्या होगा, कहा नहीं जा सकता। मुख्य अभियंता का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। काम समयबद्ध तरीके से पूरा करा लिया जाएगा।