शैलेंद्र पांडेय रायपुर, रीवा के रहने वाले हैं और हार्डवेयर के व्यापारी हैं। रीवा के ही सीमेंट विक्रेता अजय पांडेय उनके करीबी हैं। शैलेंद्र ने बताया कि दो दिन पहले वह किसी काम से गौहनिया आए थे। वहां एक दुकान पर चाय-नाश्ते के लिए रुके तो वहां एक युवक आया। उसने अपना नाम श्यामा निवासी पावरी थाना खीरी बताया।
उसने एक पीले रंग की धातु दिखाई, जो भगवान गणेश के सूंड़ के आकार की थी। उसका वजन करीब 1.8 ग्राम था। उसने बताया कि यह सोना है, जो उसे एक नदी में मिला है। उसे तत्काल पैसों की जरूरत है और वह चाहें तो इसे सस्ते में खरीद सकते हैं। शैलेंद्र ने इसे एक सोनार को दिखाया, जिसने फौरी तौर पर देखने पर इसे सोना बता दिया। इसके बाद वह उनकी बातों में आ गए और फिर रीवा जाकर उसे धातु के बदले में छह लाख रुपये दे दिए।
कुछ दिनों बाद वह धातु को लेकर एक अन्य सोनार के पास पहुंचे तो उसने जो बताया, वह सुनकर उनके होश उड़ गए। बताया कि धातु के कोनों पर सोना है, जबकि शेष पीतल है। शैलेंद्र के पास श्यामा का मोबाइल नंबर था, जिस पर उन्होंने संपर्क किया ताे वह इधर-उधर की बातें करने लगा। इसके बाद उन्होंने घूरपुर थाने पहुंचकर शिकायत की। मामला डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव तक पहुंचा तो उन्होंने एसओजी यमुनापार को साथ लेकर खुद जांच शुरू कर दी।
सर्विलांस व अन्य माध्यम से एसओजी यमुनानगर प्रभारी नवीन सिंह व उनकी टीम ने बृहस्पतिवार रात को श्यामा को पकड़ा गया। इसके बाद उससे पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर उसके साथी प्रकाश बिंद निवासी मझिगवां कौंधियारा को भी गिरफ्तार किया गया। दोनों की निशानदेही पर हूबहू व्यापारी को दी गई ठोस धातु जैसे ही तीन अन्य टुकड़े बरामद किए गए। साथ ही पांच लाख रुपये नकद भी मिले।
मेजा का सराफ बनाता था नकली सोना
डीसीपी के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह मेजा के मेड़रा निवासी सराफा कारीगर जुगनू बिंद की मदद से नकली सोना बनाते हैं। वह पीतल में किनारों पर सोने की परत चढ़ा देता है। इसके बाद वह उसे भाेले-भाले लोगों को सोना बताकर बेच देते हैं। दोनों आरोपियों को जेल भेजकर जुगनू की तलाश की जा रही है। गिरफ्तार प्रकाश कारपेंटर जबकि श्यामा बाइक मिस्त्री है। प्रकाश पहले भी जेल जा चुका है।