जिला अदालत ने अपहरण कर हत्या के आरोप में एक को उम्रकैद और दो को सबूत मिटाने में पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। यह आदेश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार मिश्रा-II की अदालत ने एडीजीसी टीएन दीक्षित को सुनकर दिया।
जितेंद्र केसरवानी ने एक अप्रैल 2022 को बेटे आदर्श केसरवानी के लापता होने की रिपोर्ट कोतवाली थाने में दर्ज कराई थी। आदर्श दुकान पर गया था पर लौटा नहीं। बाद में जांच में सामने आया कि आदर्श का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई और शव छिपा दिया गया। इसके बाद पुलिस ने अपहरण और हत्या के आरोप में अतुरसुइया, गंगादास चौक निवासी तेजस चोपड़ा उर्फ बिट्टू, कोतवाली थाने के भारतीय भवन निवासी मोनू सास्वत, मुट्ठीगंज थाने के मालवीय नगर निवासी अमित केसरवानी समेत पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
कोर्ट ने आरोपी मोनू सारस्वत को हत्या और अपहरण का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, सबूत मिटाने के मामले में अमित केसरवानी और तेजस चोपड़ा उर्फ बिट्टू को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच साल के कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
कोर्ट में ट्रायल के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने पुलिस विवेचना में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल, गवाहों के बयान और अभियुक्तों की निशानदेही पर शव की बरामदगी जैसे अहम साक्ष्य प्रस्तुत किए। जिसके आधार पर कोर्ट ने माना कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि हत्या साजिश के तहत की गई।