मुख्य आरोपी छोटू व मोहित अब भी पुलिस की पकड़ से दूर
घायल गार्ड की पीठ से ऑपरेशन कर निकाली गईं गोलियां
प्रयागराज। कचहरी रोड पर एक दिन पहले सरेशाम अस्पताल के गार्ड शैलेंद्र पासी उर्फ मिथुन (25) को गोली मारने का एक नामजद आरोपी हिरासत में ले लिया गया है। हालांकि, मुख्य मोहित व छोटू पासी समेत तीन अन्य आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। उधर, रात मेें ही ऑपरेशन कर घायल गार्ड के शरीर से तीन गोलियां निकाली गईं, जिसके बाद उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
शिवकुटी के भुलई का पूरा निवासी शैलेंद्र पुत्र पुरुषोत्तम बेली अस्पताल में संविदा पर गार्ड है। एक दिन पहले उसे घर लौटते वक्त बाइकसवार बदमाशों ने तीन गोलियां मारी थीं, जिसके बाद उसे पहले एसआरएन व फिर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। देर रात डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उसके शरीर में फंसी गोलियां निकालीं। घायल के बयान के आधार पर घटना में सभासद पुत्र मोहित पासी, छोटू पासी, मनीष पासी व पप्पू को नामजद किया गया। वारदात के बाद रात में ही कर्नलगंज व शिवकुटी पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच ने भी तलाश में दबिश दी, लेकिन आरोपियों को पकड़ा नहीं जा सका। सूत्रों की मानें तो शनिवार दोपहर पुलिस ने एक नामजद आरोपी पप्पू को हिरासत में ले लिया। हालांकि, कर्नलगंज इंस्पेक्टर इससे इंकार करते रहे। मुख्य मोहित व छोटू समेत तीन आरोपी अब भी पकड़ से दूर हैं और पुलिस का कहना है कि उनकी तलाश की जा रही है।
करीब दो दर्जन मामले, फिर भी कार्रवाई नहीं
सूत्रों के मुताबिक, मामले में नामजद मोहित व छोटू पासी पर कुल मिलाकर लगभग दो दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। मोहित पर 14 जबकि छोटू पर 10 मुकदमे हैं। दोनों शिवकुटी थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं। लगातार आपराधिक वारदातों में नाम सामने आने के बाद नवंबर 2017 में दोनों की हिस्ट्रीशीट खोली गई थी। जिसमें कहा गया कि दोनों गैंग बनाकर आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं।
दारोगा ने बदलवा दी थी तहरीर
गार्ड को गोली मारने के आरोपियों पर शिवकुटी पुलिस मेहरबान है। इतना कि फायरिंग व बमबाजी की वारदात को मारपीट की धाराओं में दर्ज किया था। बता दें कि पांच सितंबर की रात लाला की सराय में बमबाजी हुई थी। यहां रहने वाले संजय ने बताया था कि उसके घर के सामने एक नामजद आरोपी व उसके साथी बाहरी युवक को बेरहमी से पीट रहे थे। मना करने पर बमबाजी कर दी थी जिसमें रिपिट व छर्रे लगने से विकास, मुकेश, किरन व उसकी बेटी अजीता और पप्पू घायल हुए। आरोप है कि थाने में शिकायत पर एक दरोगा ने दबाव बनाकर तहरीर में बमबाजी की जगह लाठी-डंडे से हमले की बात लिखवा दी और फिर मारपीट की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की।