नोटबंदी के दौरान पांच सौ और हजार के नोट में मोटी रकम बैंक खातों में जमा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की शुरूआत ओमारा ज्वैलर्स से हुई। आयकर विभाग के सर्वे में ओमारा ज्वैलर्स के मालिक ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत सवा दो करोड़ रुपये सरेंडर किए। नोटबंदी के दौरान की गई बिक्री में शोरूम के मालिक इस रकम का हिसाब नहीं दे सके। अब शोरूम मालिक को 49.5 प्रतिशत टैक्स जमा करना होगा, जबकि 25 प्रतिशत रकम चार वर्ष बंधक रहेगी।
आयकर विभाग के सहायक निदेशक जांच (वाराणसी) अभय ठाकुर के नेतृत्व में दो टीमों ने शनिवार को दोपहर में सिविल लाइंस में स्ट्रेची रोड स्थित ओमारा ज्वैलर्स और उनके बहुगुणा मार्केट के पास स्थित आवास पर एक साथ सर्वे किया था। सर्वे की कार्रवाई पूरी रात चली और रविवार सुबह आठ बजे खत्म हुई। इस दौरान आठ नवंबर से शोरूम से हुई बिक्री का रिकार्ड खंगाला गया। जांच में पता चला कि हीरे, सोने की काफी ज्वैलरी पांच सौ और हजार के नोट में बिना पक्की रसीदों के बेची गई। जांच के दौरान शोरूम और आवास से काफी संदिग्ध दस्तावेज भी जब्त किए गए।
आयकर विभाग के अफसरों के मुताबिक जांच पड़ताल के दौरान शोरूम मालिक सवा दो करोड़ रुपये की बिक्री का हिसाब नहीं दे सके। इसके बाद यह रकम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत सरेंडर कर दी। इसमें से 49.5 प्रतिशत टैक्स जमा करने के साथ 25 फीसदी रकम चार वर्ष तक बंधक रहेगी। शेष 25 फीसदी रकम वापस कर दी जाएगी।