जिले की भिंडी खाड़ी देशों में सबसे अधिक पसंद की जा रही है। जुलाई में 20.83 मीट्रिक टन भिंडी यूएई भेजी गई है। इसके पहले पिछले वित्तीय वर्ष में 80 मीट्रिक टन भिंडी का निर्यात किया गया था। किसानों की उपज अब देश ही नहीं, बल्कि विदेश के बाजारों में भी अलग पहचान बना रही है।
तीन वर्षों में मंडल से कृषि एवं उद्यान उत्पादों के निर्यात से करीब 112 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है। मंडल के सहायक कृषि विपणन अधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र बताते हैं कि मंडल में मिर्च के बाद भिंडी सबसे अधिक निर्यात करने वाला उत्पाद बन गया है।
कृषि निर्यात नीति-2019 के तहत किसानों, एफपीओ और कृषि उद्यमियों को अब 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। 50 से 100 हेक्टेयर के कृषि निर्यात क्लस्टर विकसित करने पर छह लाख रुपये तक प्रोत्साहन है। पैकेजिंग, ब्रांडिंग और गुणवत्ता सुधार पर 40 प्रतिशत या अधिकतम 15 लाख रुपये, जबकि निर्यात के लिए 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता सरकार दे रही है।
110 हेक्टेयर पहुंचा भिंडी का रकबा
गंगापार के किसान उमेश पटेल बताते हैं कि खीरा और भिंडी की तरफ किसानों का तेजी से रुझान बढ़ा है। खीरा पॉली हाउस में बड़े किसानों की पहली पसंद है, वहीं सीमांत और छोटे किसानों को भिंडी सबसे अधिक रास आ रही है। इलाके में किसान 110 हेक्टेयर में भिंडी पैदा कर रहे हैं। फूलपुर फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़े 84 किसानों की इसमें विशेष रुचि है और इन्हीं की 20.8 मीट्रिक टन भिंडी जुलाई में निर्यात की गई है। भिंडी की दरोगा किस्म यहां के किसानों को पहली पसंद है। यह किस्म बुवाई के मात्र 45 से 48 दिनों में पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता भी इसकी सबसे अधिक है। लंबे समय तक खराब नहीं होने की वजह से निर्यात के लिए अधिक मांग है।
रमईपुर गांव में भिंडी का पहला कोल्ड स्टोरेज
डॉ. दिनेश चंद्र बताते हैं कि जिले में भिंडी का पहला कोल्ड स्टोरेज हनुमानगंज के रमईपुर गांव में स्थापित किया गया है। 20 लाख की लागत से इसका निर्माण किया गया है। इसमें दो से तीन डिग्री के बीच का तापमान रहता है। यहां भिंडी स्टोर करने से एक सप्ताह तक ताजा बनी रहती है।