200 डिग्री में अलग कर लिया हाइड्रोजन
मैग्नीशियम के बीच से हाइड्रोजन कणों को अलग करने के लिए अभी तक 419 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करना पड़ता है। वैज्ञानिकों ने पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा के उपयोग से नैनो उत्प्रेरक को विकसित किया और इसकी मदद से 200 डिग्री सेल्सियस में ही हाइड्रोजन अलग करने में कामयाबी पा ली। इस नैनो उत्प्रेरक के कारण ही लैब में हाइड्रोजन ईंधन को सस्ता और सुरक्षित बनाना संभव हो सका। प्रो. यादव के मुताबिक, हाइड्रोजन को और कम तापमान में अलग करने की प्रक्रिया में जुटे हैं। यह कामयाबी मिलते ही हाइड्रोजन ईंधन का व्यावसायिक इस्तेमाल काफी आसान हो जाएगा।
पेट्रोल और सीएनजी हानिकारक, हाइड्रोजन नहीं
पेट्रोल और सीएनजी के मुकाबले हाइड्रोजन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए बेहद सुरक्षित है। कारण यह कि हाइड्रोजन टॉक्सिक (जहरीली) नहीं है, जबकि पेट्रोल और सीएनजी खतरनाक हैं। यही नहीं, हाइड्रोजन में ऊर्जा भी इनके मुकाबले ज्यादा (33.33 किलोवाट प्रति किलोग्राम) मिलती है, जबकि पेट्रोल में 12.2 और सीएनजी में 13.9 प्रति किलोग्राम ही ऊर्जा मिल पाती है।
केंद्र सरकार की समिति में भी सदस्य रहे प्रो. यादव
भारत की हाइड्रोजन इकोनॉमी पर अध्ययन के लिए 15 अगस्त 2021 को गठित समिति का प्रो. टीपी यादव भी हिस्सा रहे हैं। वह हाइड्रोजन एनर्जी पर काम कर रहे थे। कमेटी ने 2023 में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।