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Research : महंगाई से नहीं निकलेगा तेल...नैनो उत्प्रेरक की मदद से बनाया सस्ता हाइड्रोजन फ्यूल

Wed, 16 Oct 2024 05:58 PM IST
विनोद सिंह अमित सरन, अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मैग्नीशियम के बीच से हाइड्रोजन कणों को अलग करने के लिए अभी तक 419 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करना पड़ता है। वैज्ञानिकों ने पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा के उपयोग से नैनो उत्प्रेरक को विकसित किया और इसकी मदद से 200 डिग्री सेल्सियस में ही हाइड्रोजन अलग करने में कामयाबी पा ली।
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हाईड्रोजन। - फोटो : Stock Adobe
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विस्तार
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) और बीएचयू के वैज्ञानिकों ने नैनो उत्प्रेरक की मदद से सस्ता और सुरक्षित हाइड्रोजन फ्यूल तैयार किया है। ठोस फ्यूल पहली बार बनाया गया है। अभी गैस और लिक्विड हाइड्रोजन फ्यूल ही बनाते हैं, जिसमें लागत अधिक आती है। यह असुरक्षित भी है। ताजा शोध यूनाइटेड किंगडम (यूके) के जर्नल ऑफ हाइड्रोजन एनर्जी ने प्रकाशन के चुना है।

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दुनिया के शीर्ष दो फीसदी वैज्ञानिकों में शामिल इविवि के भौतिक विज्ञानी प्रो. टीपी यादव और बीएचयू के प्रो. अबू साज व वैज्ञानिक योगेश कुमार यादव ने ठोस रूप में हाइड्रोजन फ्यूल बनाकर तीसरा तरीका ईजाद किया है। इसके लिए मैग्नीशियम का इस्तेमाल किया गया है। यह फ्यूल काफी सस्ता, उपयोग में सुविधाजनक और पर्यावरण व स्वास्थ्य के लिहाज से भी अनुकूल है।

प्रो. टीपी यादव के मुताबिक, ठोस की पैकिंग डेंसिटी काफी अधिक होने से इस फ्यूल का इस्तेमाल करने में न तो विस्फोट की कोई आशंका है और न ही इसे लाने-ले जाने में कोई मुश्किल। जबकि, अब तक हाइड्रोजन फ्यूल गैस और लिक्विड फॉर्म में बनाया जाता है।
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प्रो. यादव बताते हैं कि ईंधन के रूप में लिक्विड हाइड्रोजन का उपयोग सैटेलाइट प्रक्षेपण में होता है, जो अत्यधिक महंगा है और आम जनमानस से दूर भी। वहीं, गैस रूप में हाइड्रोजन ईंधन को हाई प्रेशर सहने वाले सिलेंडर में स्टोर करना पड़ता है, जो सुरक्षित नहीं है। सिलेंडर में विस्फोट होने या आग लगने का खतरा हर वक्त बना रहता है।

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200 डिग्री में अलग कर लिया हाइड्रोजन

मैग्नीशियम के बीच से हाइड्रोजन कणों को अलग करने के लिए अभी तक 419 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करना पड़ता है। वैज्ञानिकों ने पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा के उपयोग से नैनो उत्प्रेरक को विकसित किया और इसकी मदद से 200 डिग्री सेल्सियस में ही हाइड्रोजन अलग करने में कामयाबी पा ली। इस नैनो उत्प्रेरक के कारण ही लैब में हाइड्रोजन ईंधन को सस्ता और सुरक्षित बनाना संभव हो सका। प्रो. यादव के मुताबिक, हाइड्रोजन को और कम तापमान में अलग करने की प्रक्रिया में जुटे हैं। यह कामयाबी मिलते ही हाइड्रोजन ईंधन का व्यावसायिक इस्तेमाल काफी आसान हो जाएगा।
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पेट्रोल और सीएनजी हानिकारक, हाइड्रोजन नहीं

पेट्रोल और सीएनजी के मुकाबले हाइड्रोजन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए बेहद सुरक्षित है। कारण यह कि हाइड्रोजन टॉक्सिक (जहरीली) नहीं है, जबकि पेट्रोल और सीएनजी खतरनाक हैं। यही नहीं, हाइड्रोजन में ऊर्जा भी इनके मुकाबले ज्यादा (33.33 किलोवाट प्रति किलोग्राम) मिलती है, जबकि पेट्रोल में 12.2 और सीएनजी में 13.9 प्रति किलोग्राम ही ऊर्जा मिल पाती है।

केंद्र सरकार की समिति में भी सदस्य रहे प्रो. यादव

भारत की हाइड्रोजन इकोनॉमी पर अध्ययन के लिए 15 अगस्त 2021 को गठित समिति का प्रो. टीपी यादव भी हिस्सा रहे हैं। वह हाइड्रोजन एनर्जी पर काम कर रहे थे। कमेटी ने 2023 में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
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