प्रयागराज। प्रोस्टेट और मूत्राशय के कैंसर से बचाव को जागरूकता जरूरी है। गुर्दा रोग विशेषज्ञों ने रविवार को इस बात पर जोर दिया कि लोग सेहत के प्रति खुद सचेत रहें, तभी जटिल बीमारियों की चपेट में आने से बचा जा सकता है। सलाह दी गई कि यदि कैंसर से बचना है तो कम से कम घर की रसोई में कढ़ाई का तेल ठंडा होने पर दोबारा इस्तेमाल न करें। साथ ही धूम्रपान से भी तौबा करें। इससे प्रोस्टेट ही नहीं, फेफड़ों में कैंसर होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
यूरो ऑनकॉन में विशेषज्ञों ने प्रोस्टेट कैंसर की पहचान के बारे में जानकारी दी। बताया कि अधिकतर मामलों में मरीज की लापरवाही उसकी सेहत पर भारी पड़ती है। मरीज में रोग का जल्द पता लगने से उसका सही उपचार कर जीवन अवधि बढ़ाई जा सकती है। शाम को हुए उद्घाटन सत्र में प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह, डॉ. दिलीप चौरसिया, आयोजन सचिव डॉ. शिरीष मिश्रा, डॉ. संतोष सिंह आदि मौजूद रहे।
तकनीकी सत्र में कोकिला बेन हास्पिटल मुंबई के डॉ. युवराज, टाटा मेमेरियल के डॉ. गगन प्रकाश, बंगलूरू से आए डॉ. रंगनाथ समेत कई विशेषज्ञों ने रोबोटिक सर्जरी की खूबियां और मरीजों को दर्द रहित उपचार देने के संबंध में अपने अनुभव साझा किए।
धूम्रपान प्रोस्टेट कैंसर का बड़ा कारण
एम्स दिल्ली में 35 साल सेवाएं देने के बाद मेदांता अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी कर रहे डॉ. एनपी गुप्ता ने बताया कि धूम्रपान का संक्रमण प्रोस्टेट पर असर डालता है। अब सुविधाएं बढ़ी हैं, इसलिए रोगों की पहचान और निदान जल्द हो जाता है। उन्होंने बताया कि धूम्रपान करने वालों में प्रोस्टेट कैंसर की रिपोर्ट चौंकाने वाली हैं। ऐसे मरीजों में फेफड़ों में संक्रमण या कैंसर भी हो सकता है। उन्होंने साफ कहा कि प्रोस्टेट उम्र संबंधी बीमारी है, यह खाने पीने से नहीं होती। उन्होंने बताया कि यदि उम्र 50 की हो जाए तो रक्त में पीएसए और पेशाब की जांच के साथ पेट का अल्ट्रासाउंड साल में एक बार जरूर कराएं। इससे मरीज के शरीर में प्रोस्टेट संबंधी बीमारियों और कैंसर का पता लगाया जा सकता है।
रोबोटिक कैंसर सर्जरी है कारगर
राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट दिल्ली से आए डॉ. सुधीर रावल ने बताया कि किसी व्यक्ति के पेशाब में रुकावट हो, बार-बार पेशाब जाना पड़ता है या रात में कई बार पेशाब के लिए बिस्तर से उठना पड़ता है तो एहतियातन यूरोलॉजिस्ट की सलाह लें। पेशाब से खून आ रहा है, पेशाब के समय दर्द होता है तो जान लें कि स्थिति गंभीर है। उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट या मूत्राशय की नली का कैंसर अब लाइलाज नहीं है। कई मामलों में दवा से ही मर्ज दूर हो जाता है। प्रोस्टेट या मूत्राशय की नली के कैंसर के उपचार में हार्मोनिक सर्जरी, रोबोटिक सर्जरी कारगर है। उन्होंने बताया कि देश में सिर्फ 72 स्थानों पर रोबोटिक सर्जरी हो रही है, जिनमें 16 सेंटर दिल्ली में हैं। यूपी में यह सुविधा एसजीपीजीआई में उपलब्ध है।
क्या है पीएसए जांच
गुर्दा और मूत्र रोग विशेषज्ञ मरीज की स्थिति देखकर यह जांच कराते हैं। मेडिकल कॉलेज में यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिलीप चौरसिया ने बताया कि रक्त में पीएसए (प्रोस्टेटिक स्पेस्फिक एंटीजेन) की जांच में प्रोस्टेट कैंसर के बारे में जानकारी मिल जाती है। उन्होंने बताया कि जरूरी नहीं कि हर मरीज की सर्जरी की जाए। कई मामलों में प्रारंभिक स्तर की बीमारी दवाओं से ही ठीक हो जाती है। रोबोटिक सर्जरी से पहले रेडियो, कीमोथेरेपी से भी बीमारी ठीक हो सकती है। कई मामलों में पौरुष ग्रंथि निकालने से कैंसर से मुक्ति मिल जाती है।