जिले के अधिकारियों ने शासन का आदेश रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। सोमवार को पांच दिन बाद कार्यालय खुले, लेकिन अफसर गायब थे। फरियादी इंतजार कर रहे थे, लेकिन दिवाली के जश्र में डूबे अधिकारियों का कुछ पता नहीं था। जबकि शासन ने सुबह नौ बजे से अफसरों को कार्यालय में बैठकर लोगों की समस्याएं सुनने का निर्देश दिया है। सोमवार को अमर उजाला की पड़ताल में अधिकांश अफसर गायब मिले।
सोमवार को कृषि भवन में उपकृषि निदेशक डा. रघुनाथ सिंह व भूमि संरक्षण अधिकारी नरोत्तम कुमार अपने कार्यालय में सुबह 9.35 बजे तक नहीं पहुंचे थे। जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह की कुर्सी 9.38 बजे खाली पड़ी थी। विकास भवन में तो पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ था। विकास विभाग के मुखिया सीडीओ राजकमल यादव के कार्यालय का दरवाजा खुला जरूर था, लेकिन साफ-सफाई हो रही थी। वह 9.47 बजे तक कार्यालय नहीं पहुंचे थे। परियोजना निदेशक दयाराम यादव की कुर्सी 9. 52 बजे तक खाली रही। 9.30 बजे जिला पंचायत राज अधिकारी उमाकांत पांडेय, 9.50 बजे पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ज्योति त्रिवेदी भी अपने कार्यालय में नहीं मिलीं।
अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी विजय प्रताप यादव भी गायब रहे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. विजय प्रताप सिंह व युवा कल्याण अधिकारी अरुण कुमार 9.39 बजे तक कार्यालय नहीं पहुंचे थे। जिला कार्यक्रम अधिकारी पवन कुमार यादव 9.26 और जिला विकास अधिकारी सुदामा प्रसाद 9.25 बजे तक अपने कार्यालय नहीं पहुंचे थे। लघु सिंचाई सहायक अभियंता राजेश गुप्ता, सहायक निबंधक सहकारिता अमित पांडेय का कार्यालय खुला था, लेकिन वह नहीं आए थे। आरईएस एक्सईएन एनके दुबे 9.23 बजे तक अपने कार्यालय नहीं पहुंचे थे। जिला समाज कल्याण अधिकारी एनएन द्विवेदी अपने कार्यालय में 9.46 बजे पहुंचे। जिला पूर्ति अधिकारी सुनील कुमार यादव 10 बजे तक कार्यालय नहीं आए थे। सदर बीडीओ दिनेश यादव भी अपने कार्यालय में 10.10 बजे तक नहीं पहुंचे थे।