शिक्षा निदेशालय के बाथरूम की हालत
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शिक्षा निदेशालय...यहां अपर शिक्षा निदेशक स्तर से लेकर उप सचिव तक 20 से अधिक अफसर, 300 से ज्यादा कर्मचारी प्रदेश भर के शिक्षकों की समस्याओं का निराकरण करते हैं लेकिन वह अपनी समस्या का समाधान नहीं करा पा रहे हैं। समस्या है शौचालय की।
निदेशालय के दो शौचालयों में से एक में ताला जड़ा है तो दूसरे की हालत खस्ताहाल है। इस वजह से कर्मचारियों- यहां आने वाले शिक्षकों को परेशान होना पड़ता है।
शिक्षा निदेशालय में बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, राजकीय शिक्षा और उच्च शिक्षा के दफ्तर खुले हैं लेकिन शौचालय ताले में बंद। यह प्रदेश भर से आने वाले शिक्षक, शिक्षणेतर कर्मचारी और पेंशनभोगियों के साथ छोटे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। उन्हें मजबूरन सुलभ शौचालयों का इस्तेमाल करना पड़ता है।
बजट आया फिर भी शौचालय जर्जरनिदेशालय के दोनों शौचालयों की स्थिति सुधारने के लिए महाकुंभ में पांच लाख का बजट आया था। कई कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि महाकुंभ के दौरान मरम्मत के लिए बजट आया था। इसके बाद भी शौचालयों की स्थिति जर्जर है। एक में तो ताला लटका है।
बजट का उपयोग न होने पर उठे सवाल
कर्मचारियों के अनुसार, शौचालय की मरम्मत के लिए आए बजट का उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने पीने के पानी के समुचित इंतजाम की भी मांग की। एडी माध्यमिक कामता राम पाल ने कहा कि पांच लाख रुपये के बजट की बात उनके संज्ञान में है। इसकी छानबीन की जाएगी। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि खर्च न होने के कारण बजट वापस चला गया हो। उन्होंने नए शौचालय के निर्माण के लिए शासन को पत्र लिखने की बात कही है।