मौजगिरि परिसर में पंचदशनाम जूना अखाड़े के रमता पंच के आगमन के साथ ही परंपरा भी पुनर्जीवित हुई। आराध्य भगवान दत्तात्रेय के मंदिर को बृहस्पतिवार को नया रूप मिला। पारदर्शी और भगवा रंग की मोटी प्लास्टिक से विशेष रूप से तैयार कराया गया यह अष्टकोणीय मंदिर जर्मनी से मंगाया गया, जिसे मौजगिरि परिसर की रमता पंच की छावनी में स्थापित किया गया। खास यह कि इस वाटरप्रूफ मंदिर की दो दीवारों को मिलाने के लिए मोटी प्लास्टिक के किनारों पर एल्युमिनियम भी लगे हैं, जिससे दोनों दीवारे आसानी से जुड़ सकें। प्रतिमा और चरण पादुका स्थापना आगमन के साथ ही हो गई थी। मंदिर के बाहर ही घंटा एवं घंटी बांधी गई, जिससे संतों को पूजा के लिए सूचना दी जाएगी।
मंदिर तैयार होने तक परंपरा के मुताबिक देवता भाले को बिना सिले कपड़ों के साथ दिगंबर संत, जूना के नागा संन्यासी ने ही पीठ पर धरे रखा। मंदिर के पूर्व की ओर चांदी के सिक्के और कलश के आधार पर उसे स्थापित किया गया। अष्टकोणीय मंदिर के बाहर ही घंटा एवं घंटी बांधी गई, जिससे संतों को पंच पूजा, आरती के लिए सूचना दी जाएगी। छावनी सजी कोठार, सरदार, कारोबारी सहित पूरी कैबिनेट ने भी अपनी-अपनी जिम्मेदारी संभाल ली। चार मढ़ी, तेरह मढ़ी, चौदह मढ़ी और सोलह मढ़ी के शिविर लगे, जहां उनके श्रीमहंत और उनके साथ अष्टकौशल महंत के आसन लगे।
नाम के मुताबिक रमता पंचों का कहीं स्थायी ठौर नहीं होता है। जहां शाम हुई वहीं पर छावनी लग गई। अस्थायी छावनी लगी, नियत समय पर सांध्यकालीन आरती, पूजन हुआ फिर संतों ने भोजन किया। सुबह भी भगवान को बालभोग के बाद ही रमता पंच अगली मंजिल के लिए रवाना होता है। भगवान के पूजन-आरती का क्रम कतई बाधित नहीं होता है। अखाड़े के निर्णयों में रमता पंच की राय सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसमें अखाड़े के श्रीमहंत और अष्टकौशल महंत शामिल होते हैं।
सोलह मढ़ी के अष्टकौशल महंत दयानंद पुरी कहते हैं, उज्जैन कुंभ से चला काफिला प्रयागराज कुंभ के लिए पहुंचा है। संगम की रेती पर छावनी प्रवेश से पहले तक यहीं मौजगिरि की छावनी में ही पूजा-अनुष्ठान का क्रम जारी रहेगा। इस दौरान अखाड़े से जुड़े मठ, मंदिरों, संतों, व्यवस्थाओं सहित परंपरा के प्रचार-प्रसार और विस्तार आदि के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। कुंभ के बाद नए चुनाव होंगे और सभी की जिम्मेदारियां बदल जाएंगी। नए महंत, नई जिम्मेदारियां संभालेंगे और नया रमता पंच रेती का संदेश लेकर अगले कुंभ के लिए हरिद्वार को रवाना हो जाएगा।
रमता पंच के श्रीमहंत
0 चार मढ़ी के श्रीमहंत विश्वंभर भारती
0 तेरह मढ़ी के श्रीमहंत बलराज गिरि
0 चौदह मढ़ी के श्रीमहंत आनंद गिरि
0 सोलह मढ़ी के श्रीमहंत गोल्डेन पुरी