इलाहाबाद विश्वविद्यालय संघटक महाविद्यालय शिक्षक संघ (ऑक्टा) के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं महासचिव पद के लिए कॉलेजों के वही शिक्षक चुनाव लड़ सकेंगे, जिन्हें ऑक्टा की सदस्यता ग्रहण किए कम से कम पांच वर्ष हो चुके हैं। इसके साथ ही कोषाध्यक्ष एवं सह सचिव के लिए कम से कम तीन वर्ष और स्थानीय इकाई के अध्यक्ष एवं सचिव पद के लिए न्यूनतम दो वर्ष की ऑक्टा की सदस्य अनिवार्य होगी। यह निर्णय ऑक्टा की मंगलवार को हुई बैठक में लिया गया।
बैठक में सभी सदस्यों ने पीएचडी इंक्रीमेंट का निर्धारण की मांग की। इस बात पर रोष जताया कि प्रोन्नति के दो वर्ष बाद भी एरियर नहीं मिला। तय हुआ कि कुलपति से मिलकर उन्हें समस्या से अवगत कराया जाएगा। इसके साथ ही पिछले सत्र के क्रेट परिणाम के आधार पर महाविद्यालय शिक्षकों को शोध कार्य कराने की अनुमति का मुद्दा भी उठा। यह भी तय हुआ कि कॉलेजों में छूटे हुए विषयों में इसी सत्र 2019-20 से शोध कराने की अनुमति के लिए कुलपति से मुलाकात की जाएगी। इसके अलावा कॉलेजों में कैश के तहत प्रोफेसर पद पर प्रोन्नति का मुद्दा भी कई शिक्षकों ने उठाया।
कुछ सदस्यों ने कहा कि कॉलेजों के स्ववित्त पोषित कोर्सों में फीस एवं वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करते हुए सभी पाठ्यक्रमों में अधिकतम फीस एवं न्यूनतम वेतन निर्धारण विश्वविद्यालय को करना चाहिए। यह भी तय हुआ कि सामान्य सभा की पहली बैठक मई के प्रथम सप्ताह में होगी। बैठक की अध्यक्षता ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह एवं संचालन महासिचव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने की। बैठक में डॉ. रेखा रानी, डॉ. आरपी सिंह, डॉ. रणधीर सिंह, डॉ. केएन सिंह, डॉ. संतोष श्रीवास्तव, डॉ. आनंद कुमार, डॉ. नरेंद्र बाजपेयी आदि मौजूद रहे।