यूपी बोर्ड ही नहीं मदरसा बोर्ड में भी छात्र-छात्राओं की संख्या में तेजी से कमी आई है। विगत तीन वर्षों में ही 30 फीसदी परीक्षार्थी कम हो गए हैं। मदरसा बोर्ड की परीक्षाओं में 10 हजार से अधिक विद्यार्थी शामिल हुआ करते थे लेकिन इस बार मात्र 7109 छात्र-छात्रा ही पंजीकृत हैं ।
प्राइवेट आवेदन करने वालों की संख्या तो ना के बराबर हो गई है। इसके पीछे पूरी व्यवस्था ऑनलाइन करने तथा परीक्षा में सख्ती को कारण माना जा रहा है।
मदरसों का विवरण ऑनलाइन किए जाना अनिवार्य कर दिया गया है। 2018 में यह व्यवस्था लागू होने के बाद 80 तो मदरसे ही बंद हो गए। इससे पहले विभिन्न पाठ्यक्रमों में 11 हजार से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत थे लेकिन मदरसों के बंद होने के बाद संख्या 10 हजार के नीचे आ गई। इसके बाद पंजीकरण की प्रक्रिया और परीक्षा में सख्ती के बाद विद्यार्थी कम हो गए।
पिछले वर्ष साढ़े आठ हजार विद्यार्थी विभिन्न पाठ्यक्रमों में पंजीकृत थे लेकिन इस बार यह संख्या मात्र 7109 रह गई है। उप निदेशक अल्प संख्यक कल्याण शिव प्रकाश तिवारी ने बताया कि सख्ती के बाद फर्जी विद्यार्थी बाहर हो गए हैं।