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लॉक डाउन में फंसी एनआईआरएएफ रैंकिंग

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लॉकडाउन के कारण इस बार उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग जारी किए जाने की प्रक्रिया फंस गई है। कोविड-19 के मद्देनजर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नेेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है।
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मंत्रालय की ओर से हर साल चार अप्रैल को एनआईआरएफ रैंकिंग जारी की जाती है और टॉप 100 की सूची में शामिल होने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों को आवंटित होने वाले बजट में एनआईआरएफ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह रैंकिंग वर्ष 2016 से शुरू की गई। पहली बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) को एनआईआरएफ रैंकिंग में 68वां स्थान मिला था, जबकि 2018 में इविवि को 95वीं रैंक मिली। इसके बाद एनआईआरएफ रैंकिंग में इविवि का ग्राफ तेजी से गिरा। वर्ष 2018 में इविवि एनआईआरएफ रैंकिंग के टॉप 100 शिक्षण संस्थानों की सूची से बाहर हो गया और उसे 141 वां स्थान हासिल हुआ। वर्ष 2019 की रैंकिंग में इविवि को तगड़ा झटका लगा और इस बार विश्वविद्यालय टॉप 200 शिक्षण संस्थानों की सूची में भी जगह नहीं बना सका। एनआईआरएफ रैंकिंग कई बिंदुओं की समीक्षा के बाद निर्धारित की जाती है। इसमें शिक्षक-छात्र अनुपात के साथ शिक्षकों के प्रकाशित हुए पब्लिकेशन की संख्या भी शामिल है। इसके अलावा पर्सेप्शन को भी आधार बनाया जाता है। इविवि में शिक्षक के 855 पद सृजित हैं। जबकि, कार्यरत शिक्षकों की संख्या 324 है। वहीं, छात्रों की संख्या तकरीबन 25 हजार है। यूजीसी का मानक है कि एक शिक्षक के मुकाबले छात्रों की संख्या 30 होनी चाहिए जबकि इविवि में यह अनुपात काफी अधिक है। वहीं, शिक्षकों की संख्या काफी कम होने के कारण पेपर पब्लिकेशन की संख्या भी बहुत कम है।
नए सत्र में कई शिक्षक रिटायर हो जाएंगे और शिक्षकों की संख्या घटकर 297 के आसपास रह जाएगी। ऐसे में एमएचआरडी की ओर से सत्र 2020 की रैंकिंग जब भी जारी होगी, उसमें टॉप 100 शिक्षण संस्थानों की सूची में इविवि के लिए स्थान बना पाना फिर मुश्किल होगा। अगर नए सत्र में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई तो अगले साल जारी होने वाली एनआईआरएफ रैंकिंग में इविवि की स्थिति और बिगड़ सकती है। शिक्षकों के रिटायर होने से शिक्षक-छात्र के बीच का अनुपात और अधिक बिगड़ जाएगा। साथ ही पेपर पब्लिकेशन की संख्या भी घट जाएगी।
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