जिला अदालत परिसर में 11 मार्च को अधिवक्ता की हत्या और बवाल की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। जांच अब सिर्फ इलाहाबाद की घटना तक सीमित नहीं रहेगी। हाल के दिनों में प्रदेश भर की जिला अदालतों में हुई घटनाओं की जांच भी की जाएगी। एक सदस्यीय न्यायिक जांच समिति घटना के कारणों और उनकी रोकथाम के उपायों की भी पड़ताल करेगी। समिति ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय भी सुझाएगी। इसके लिए वकील, पुलिस और जनता सभी से जानकारियां मांगी गई हैं। न्यायिक जांच हाईकोर्ट के पीठासीन न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल कर रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों के दौरान जिला अदालतों में लगातार बढ़ रही घटनाओं, हिंसक झड़पों और हत्या की वारदात को चिंतनीय मानते हुए मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड ने जांच का दायरा पूरे प्रदेश तक बढ़ा दिया है। कचहरी में अधिवक्ता नबी अहमद की हत्या के बाद वकीलों की ओर से न्यायिक जांच की मांग उठाई गई थी। इसे स्वीकार करते हुए चीफ जस्टिस ने जस्टिस बघेल की जांच सौंप दी। उनको एक माह में अपनी रिपोर्ट देनी है। जांच का दायरा व्यापक होने से कचहरियों की सुरक्षा और आए दिन होने वाली घटनाओं पर बेहतर सुझाव आने की उम्मीद है, जिसके आधार पर भविष्य मेें ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि 11 मार्च को इलाहाबाद जिला अदालत परिसर में दरोगा शैलेंद्र सिंह और वकीलों के बीच हुए विवाद के बाद शैलेंद्र सिंह ने वकील नबी अहमद की हत्या कर दी थी। इसके बाद पुलिस और वकीलों के बीच जमकर मारपीट तथा पत्थरबाजी हुई। गोलियां भी चलीं और वाहन फूंके गए। बवाल में एक सिपाही भी गोली लगने से घायल हो गया है। दर्जनों वकीलों तथा पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं।