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रेलवे जमीन के बाद अब एक्सिस बैंक घोटाला दबाने की तैयारी

Wed, 28 Feb 2018 01:50 AM IST
अमर उजाला, इलाहाबाद
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डेमो - फोटो : डेमो
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करोड़ों रुपये के रेलवे जमीन घोटाले की तरह ही अब एक्सिस बैँक घोटाले को भी ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी शुरू कर दी गई है। लखनऊ की रहने वाली एक महिला ने शासन को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि मामले की जांच ईओडब्ल्यू (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) से कराई जाए। जिसके बाद शासन ने इस संबंध में जिले में तैनात उच्चाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। उच्चाधिकारियों ने भी मातहतों से आख्या मांगी है लेकिन पूछने पर वह ऐसी किसी जानकारी से इंकार करते रहे।
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पिछले साल मई मेें एक्सिस बैंक में 22.39 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था। आरोप था कि शुआट्स के खाते से हेराफेरी कर 2013 से 2016 के बीच यह रकम निकाली गई। मामले में ब्रांच हेड योगेश योगेश बाजपेयी की ओर से बैंक अधिकारी कमाल अहसान ओर शुआट़्स के लेखाकार राजेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। कुछ महीनों बाद बैंक की ओर से हाईकोर्ट में रिट दाखिल कर कहा गया कि पुलिस मामले की जांच में लापरवाही बरत रही है, जिसके बाद हाईकोर्ट ने एसआईटी से जांच कराने का आदेश दिया था। इस पर तत्कालीन एसएसपी की ओर से एसआईटी गठित की गई, जिसमें चेयरमैन के तौर पर एसपी क्राइम और विवेचक के तौर पर सीओ कर्नलगंज आलोक मिश्र समेत अन्य को शामिल किया गया। एसआईटी वर्तमान में भी मामले की जांच कर रही है और अब तक आठ लोगों को जेल भेज चुकी है। विवेचना के दौरान शुआट्स के वीसी आरबी लाल समेत दो अन्य अफसरों का नाम भी मामले में शामिल किया गया। हालांकि उनकी गिरफ्तारी पर कोर्ट से रोक लगी हुई है।

सूत्रों की मानें तो करोड़ों के रेलवे जमीन घोटाले की तरह अब इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है। लखनऊ की श्रीनगर कालोनी थाना मडियांव निवासी पुष्पा सिंह पत्नी अरुण सिंह ने शासन से इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू से कराने का अनुरोध किया है। इसके बाद शासन की ओर से इस संबंध में जिले में तैनात पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। सूत्रों की मानें तो शासन के निर्देश के बाद उच्चाधिकारियों ने मातहतों को पत्र भेजकर आख्या जल्द से जल्द उपलब्ध कराने को कहा है। हालांकि अधिकारी मामले को छिपाते रहे। एसएसपी आकाश कुलहरि का कहना है कि शासन से ऐसी किसी तरह की रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी उन्हें नहीं है।
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23 फरवरी को भेजा गया है पत्र
सूत्रों की मानेें तो शासन की ओर से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद उच्चाधिकारियों ने सीओ सिविल लाइंस को पत्र भेजकर आख्या मांगी है। यह पत्र 23 फरवरी को भेजा गया है। इसमें कुल सात बिंदुओं पर आख्या उपलब्ध कराने को कहा गया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि सीओ द्वितीय की ओर से यह पत्र मामले की जांच कर रहे सीओ कर्नलगंज आलोक मिश्रा को भेजा गया है। हालांकि इस बारे में सीओ कर्नलगंज से बात की गई तो उन्होंने जानकारी से इंकार किया। बाद में यह जरूर कहा कि हो सकता है कि डाक से पत्र आया हो लेकिन फिलहाल उन्हें जानकारी नहीं मिल सकी है।
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