अमौसा का मेला और गांव गया था गांव से भागा, शीर्षकों से लोक मानस में जगह बनाने वाली कैलाश गौतम की कविताएं अब विश्व पटल पर शोध, अध्ययन और नाट्य मंचन का विषय बनने वाली हैं। अबतक उनकी इन कविताओं पर कई विश्वविद्यालयों में तो शोध होने के साथ पीएचडी अवार्ड भी हो गई है।
उनकी भोजपुरी और खड़ी बोली की कालजयी कविताएं कई जगह पाठ्यक्रमों का हिस्सा भी बन चुकी हैं। लेकिन, अब उनकी चुनिंदा रचनाओं को अमेरिका, लंदन और सिंगापुर के साहित्य सेवियों की ओर से शोध और मंचन का विषय बनाए की बात शुरू हो गई है। उनकी 14वीं पुण्यतिथि की पूर्वसंध्या पर मंगलवार को यह जानकारी कैलाश गौतम सृजन संस्थान के अध्यक्ष डॉ श्लेष गौतम ने साझा की।
पुण्यतिथि पर इस बार कोरोना काल में कैलाश गौतम राष्ट्रीय कुंभ-2020 बुधवार की शाम एनसीजेडसीसी के प्रेक्षागृह में होगा। इस मौके को यादगार बनाने के लिए अखिल भारतीय कविता सम्मेलन और मुशायरा भी आयोजित किया गया है। सृजन संस्थान के अध्यक्ष श्लेष पिता की कविताओं का जिक्र करते हुए भावुक हो जाते हैं। वह लोक लोक संस्कृति के सजीव चित्रण के रूप में अमौसा का मेला का भी जिक्र करते हैं और गांव गया था गांव से भागा पर भी रोशनी डालते हैं।
वह बताते हैं कि अमौसा का मेला के पीछे जीवन के राग,अनुराग, चिंता और चुनौतियों को आने वाले समय में चित्रात्मक अभिव्यक्ति प्रदान की जाएगी। इन कविताओं पर नाट्य मंचन भी होगा। ताकि, एक-एक पंक्ति को अभिव्यक्त किया जा सके। उल्लेखनीय है कि यह कविता 80 के दशक में लिखी गई थी और उसकी पंक्तियां आज भी चरितार्थ हो रही हैं। यही वजह है कि कैलाश गौतम की एक प्रसिद्ध कविता गांव गया था गांव से भागा को विख्यात आलोचक प्रो नामवर सिंह एवं डॉ दूधनाथ सिंह ने भी सराहा था।