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Prayagraj News: स्नातक में पास होने के लिए अब 40 फीसदी अंक जरूरी

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की एकेडमिक कौंसिल ने सत्र 2025-26 से नई शिक्षा नीति लागू करने पर मुहर लगा दी है जिसके तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब वार्षिक की जगह सेमेस्टर परीक्षाएं होंगी और इसमें पास होने के लिए न्यूनतम 40 फीसदी अंक प्राप्त करने होंगे। वार्षिक परीक्षा में पास होने के लिए न्यूनतम 33 फीसदी अंक जरूरी हैं।
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इस महत्वपूर्ण बदलाव के तहत उत्तीर्ण होने के लिए छात्र को प्रत्येक विषय में 40 फीसदी अंक और कुल 40 फीसदी अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि स्नातक प्रथम वर्ष के जो विद्यार्थी सत्र 2024-25 की वार्षिक परीक्षा में फेल हो गए हैं, उन्हें भी नई शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर व्यवस्था में शामिल कर लिया गया है।
ऐसे छात्रों को भी फायदा मिलेगा। प्रथम वर्ष के पूर्व छात्रों के लिए अलग से कोई वार्षिक परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। उन्हें एनईपी पाठ्यक्रम के तहत फिर से पंजीकरण कराना होगा और नियमित छात्रों के रूप में पढ़ाई करनी होगी। चार वर्ष में स्नातक की ऑनर्स विद रिसर्च डिग्री लेने के बाद एक साल में पीजी का पाठ्यक्रम पूरा करने का मौका मिल जाएगा।
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इविवि की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। अकादमिक परिषद ने बीए, बीएससी व बीकॉम के यूजी पाठ्यक्रमों में एनईपी (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) को लागू करने के लिए नियमों को पारित किया। बदले हुए नियम विश्वविद्यालय के बीए, बीएससी बायो, बीएससी गणित व बीकॉम कार्यक्रमों पर लागू होंगे।


डिग्री और प्रमाणपत्र:
प्रथम वर्ष (सेमेस्टर 1 व 2) पूरा करने पर यूजी प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
दूसरे वर्ष (सेमेस्टर 3 व 4) के बाद डिप्लोमा दिया जाएगा।
तीसरे वर्ष (सेमेस्टर 5 व 6) के बाद दोहरी (डुअल) मेजर डिग्री दी जाएगी।
चौथे वर्ष (सेमेस्टर 7 और 8) के बाद छात्र को यूजी ऑनर्स डिग्री या रिसर्च के साथ यूजी ऑनर्स डिग्री प्रदान की जाएगी।

पाठ्यक्रम संरचना:
सेमेस्टर 1 व 4 : छात्रों को तीन विषयों का अध्ययन करना होगा जिनमें से दो मेजर विषय और तीसरा माइनर विषय होगा।
सेमेस्टर 5 व 6 : छात्र दो मेजर विषयों का अध्ययन करेंगे।
सेमेस्टर 7 व 8 : ऑनर्स या ऑनर्स विद रिसर्च डिग्री के लिए छात्र केवल एक विषय का अध्ययन करेंगे।

तीन प्रकार के वैकल्पिक विषयों का करना होगा अध्ययन
छात्रों को तीन प्रकार के वैकल्पिक विषयों का अध्ययन करना होगा जिनमें क्षमता संवर्धन, कौशल संवर्धन, मूल्य वर्धित विषय शामिल हैं। सेमेस्टर 3 व 4 में मूल्य वर्धित और बहु-विषयक पाठ्यक्रम शामिल होंगे। छात्र स्वयं पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध पाठ्यक्रमों के पूल में से चुनाव कर सकते हैं। यह पूल संकाय की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे और संसाधनों के आधार पर घोषित किया जाएगा। इसकी सूची प्रत्येक सत्र की शुरुआत में विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। छात्र को प्रति सेमेस्टर एक वैकल्पिक विषय का अध्ययन करना होगा।

मूल्यांकन और परीक्षा:
- वैकल्पिक विषयों का मूल्यांकन एक सतत मूल्यांकन होगा।
- मेजर विषयों के मूल्यांकन का तरीका सतत आंतरिक मूल्यांकन और एक तीन घंटे की लिखित परीक्षा होगी। मेजर विषयों की परीक्षा एक ही प्रश्नपत्र की होगी जिसमें प्रश्नपत्र का प्रत्येक खंड पाठ्यक्रम के एक पेपर को कवर करेगा।
- माइनर पेपर का मूल्यांकन ओएमआर शीट का उपयोग करके एक से डेढ़ घंटे की बहुविकल्पीय प्रश्न आधारित परीक्षा के माध्यम से होगा। प्रैक्टिकल पेपर के लिए कोई सतत आंतरिक मूल्यांकन नहीं होगा।

200 से अधिक वैकल्पिक विषयों पर एकेडमिक कौंसिल की मुहर
विश्वविद्यालय ने 200 से अधिक दो-क्रेडिट वाले वैकल्पिक विषय शुरू किए हैं जिनकी कक्षाएं केवल शनिवार को संचालित की जाएंगी। इन वैकल्पिक विषयों में सीटों की संख्या पाठ्यक्रम की प्रकृति के अनुसार 20 से 50 तक होगी। अन्य पाठ्यक्रमों के लिए शुल्क पाठ्यक्रम की प्रकृति के आधार पर 500 से 2000 रुपये के बीच होगा। योग और आईआईडीएस द्वारा संचालित पाठ्यक्रम निशुल्क होंगे। योग पाठ्यक्रम में लगभग 100 सीटें होंगी।

पद्मश्री मालिनी अवस्थी को मिलेगी मानद उपाधि
सदन में सर्वसम्मति से पारित एक और प्रमुख प्रस्ताव यह था कि प्रसिद्ध लोक गायिका और पद्मश्री मालिनी अवस्थी को 23 सितंबर 2025 को विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर मानद उपाधि से सम्मानित किया जाएगा।
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