इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी करने पर गाजियाबाद नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण है भी या नहीं... यह तय किए बिना ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी करना मानसिक उत्पीड़न है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी करने पर गाजियाबाद नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण है भी या नहीं... यह तय किए बिना ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी करना मानसिक उत्पीड़न है।
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इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव एवं अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने गाजियाबाद निवासी सुधीर कुमार के खिलाफ जारी नोटिस रद्द कर दिया। कोर्ट ने नगर आयुक्त को यह छूट दी है कि वह नए सिरे से नोटिस जारी कर याची को सुनवाई का अवसर देते हुए अगली कार्यवाही कर सकते हैं।
याची को वर्ष- 2006 में वेब सिनेमा कौशांबी, गाजियाबाद के पास नगर निगम की ओर से दुकान के लिए भूमि 350 रुपए प्रतिमाह किराए पर आवंटित की गई थी। 25 जून 2025 को नगर निगम ने आरोप लगाया कि याची ने आवंटित क्षेत्र से बाहर लोहे की संरचना बनाकर अतिक्रमण किया है और बिना कोई मौका दिए, निर्माण हटाने का आदेश जारी कर दिया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची ने कोई भी अवैध निर्माण नहीं किया है और अगर उसे सुनवाई का अवसर दिया जाता, तो वह यह साबित कर सकता था।