भाजपा सांसद श्यामाचरण गुप्त भले ही तंबाकू से कैंसर न होने की दावा करते हों लेकिन कुल कैंसर रोगियों में से तकरीबन चालीस फीसदी कैंसर रोगी ऐसे हैं जिनकी वजह सिर्फ और सिर्फ तंबाकू सेवन है। क्षेत्रीय कैंसर संस्थान में हर वर्ष पहुंचने वाले तकरीबन दस हजार नए कैंसर रोगियों में से चालीस फीसदी मुंह के कैंसर वाले मरीज होते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कैंसर रोगियों में सबसे अधिक मुंह के कैंसर जबकि दूसरे स्थान पर फेफड़े के कैंसर रोगी हैं।
संस्थान के एडिशनल डायरेक्टर व कैंसर विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. वी.पॉल थैलियथ के मुताबिक संस्थान में इलाज कराने पहुंचने वाले रोगियों में 40 फीसदी रोगी ऐसे है जिनके कैंसर की वजह तंबाकू सेवन है। तंबाकू सेवन से पुरुषों में 40 फीसदी जबकि महिलाओं में 15 फीसदी मुंह व फेफड़े के कैंसर रोगी हैं। कैंसर का ज्यादा असर 60 से 70 वर्ष आयु वाले पुरुषों तथा 50 से 60 वर्ष के बीच आयु वर्ग वाली महिलाओं में हैं। तेजी से बदलती जीवनशैली और खानपान में बदलाव से बच्चों में भी कैंसर की बीमारियां बढ़ी हैं।
वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.बीके मिश्रा के मुताबिक देश में हर वर्ष कैंसर के सात लाख नए मामले सामने आ रहे हैं जिसमें से 70 से 80 फीसदी मरीजों की मौत इलाज के बावजूद हो जाती है। दुर्भाग्यपूर्ण यह भी है कि भारत में ज्यादातर मरीज डॉक्टरों के पास तब पहुंचते हैं जब रोग अंतिम चरण में होता है। कैंसर की रोकथाम के लिए जल्दी पहचान, सही इलाज और अंतिम अवस्था में रोगी की देखभाल बेहद जरूरी है।