पर्यवेक्षण करने वालों की भूमिका पर भी सवाल
विवेचना का पर्यवेक्षण करने वाले भी सवालों के घेरे में हैं। बड़ा सवाल यह है कि आखिर नाबालिग पीड़िता के कोर्ट के समक्ष दिए बयान के बाद भी तीन आरोपियों को क्लीनचिट देने की बात सामने आने पर उन्होंने अपनी ओर से पड़ताल क्यों नहीं कराई। क्याें विवेचक की लिखी हुई बाताें को पर आंख मूंदकर भरोसा किया और इसे आगे बढ़ा दिया।
यह है पूरा मामला
आरोप है कि हंडिया में 26 अक्तूबर को दर्ज पॉक्सो, किशोरी के अपहरण व छेड़छाड़ के मामले में पीड़िता के कोर्ट में कथन के बाद भी टोल मैनेजर का फर्जी बयान दर्ज कर तीन आरेापियों को क्लीनचिट दे दी गई। पुलिसिया खेल की पोल मैनेजर के ही हलफनामे से खुली, जिसमें उसने दावा किया है कि वह न तो विवेचक से कभी मिला, न ही कोई बात हुई। पीड़िता की मां ने अफसरों से इन्साफ की गुहार लगाई है।