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Allahabad High Court: हाईकोर्ट में नहीं हो रही मुकदमों की लिस्टिंग

Wed, 23 Sep 2020 06:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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हाईकोर्ट में मुकदमों की लिस्टिंग, खुली अदालत में सुनवाई से बढ़ रहे संक्रमण के खतरे जैसी तमाम समस्याओं को लेकर एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने मुख्य न्यायमूर्ति को पत्र लिखा है। पत्र में वकीलों के सामने आ रही तमाम कठिनाइयों का जिक्र किया गया है। साथ ही संक्रमण के बढ़ते खतरे के मद्देनजर उपाय किए जाने की मांग की गई है। 
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एसोसिएशन के अध्यक्ष एडी सांडर्स द्वारा लिखे पत्र में कहा गया कि मुकदमों की फिजिकल और ई-फाइलिंग की अनुमति दी गई है। इन दोनों माध्यमों से बढ़ी संख्या में मुकदमे दाखिल हो रहे हैं। मगर, वकीलों के फ्रेश मुकदमों की लिस्टिंग डेढ़ महीने बाद भी नहीं हो पा रही है। वहीं तमाम ऐसे मुकदमे हैं जो तीन चार दिन में ही लिस्ट पर आ जाते हैं। वकीलों को यह नहीं पता होता कि उनका मुकदमा कब लिस्ट पर आएगा। मांग की गई कि नए दाखिल होने वाले मुकदमों को टोकन नंबर दिया जाए। 

पत्र में कहा गया कि मुकदमों की वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई को वरीयता दी जाए। क्योंकि, खुली अदालत में सुनवाई होने से परिसर में भीड़ ज्यादा हो जा रही है। कॉरिडोर और न्यायकक्षों में बड़ी संख्या में वकील आ जाते हैं, जिससे शारीरिक दूरी का पालन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में संक्रमण का खतरा बहुत बढ़ गया है। कहा गया कि व्यवस्था की गई थी कि जिन वकीलों का मुकदमा लगा है, उन्हीं को भीतर जाने दिया जाएगा।
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मगर, इस व्यवस्था का पालन नहीं हो रहा है। गेट पर किसी की जांच भी नहीं हो रही है। इससे कैंपस के भीतर काफी भीड़ हो जाती है। एसोसिएशन का यह भी कहना है कि फ्लाईओवर के नीचे वकीलों, वादकारियों, वेंडर्स आदि की बहुत भीड़ हो रही है। इससे भी संक्रमण फैलने का खतरा है। एसोसिएशन ने मांग की कि ज्यादा से ज्यादा मुकदमों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ही की जाए। 

एसोसिएशन का कहना है कि वीडियो कांफ्रेंसिंग का समय हर अदालत का अलग-अलग है। इससे वकीलों को परेशानी होती है। सभी अदालतों के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग हेतु एक निश्चित समय तय किया जाए। वीडियो लिंक मिलने में हो रही दिक्कतों को भी दूर करने की मांग की गई है। एसोसिएशन ने वकीलों के चैंबर खोलने की मांग की है जिससे कि कॉरिडोर और कोर्ट रूम के भीतर भीड़ होने से रोका जा सके। अधिवक्ता अपने मुकदमों की सुनवाई होने तक अपने चैंबर में ही रुककर इंतजार कर सकें।
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