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सेमीनार : मधुमेह, उच्च रक्तचाप को नियंत्रित न करने के हो सकते हैं गंभीर परिणाम

Mon, 16 Dec 2024 02:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मधुमेह और उच्च रक्तचाप से गुर्दे की बीमारी (क्रोनिक किडनी रोग या सीकेडी) हो सकती है। सीकेडी में गुर्दे की क्षमता कम हो जाती है और वह अपशिष्ट को हटाने और शरीर में तरल पदार्थ और रासायनिक संतुलन बनाए रखने में असमर्थ हो जाते हैं।
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उच्च रक्तचाप। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मधुमेह और उच्च रक्तचाप को अगर नियंत्रित न किया जाए तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। मधुमेह और उच्च रक्तचाप अक्सर सह-अस्तित्व में होते हैं। मधुमेह से पीड़ित लगभग 70-80 फीसदी लोगों को उच्च रक्तचाप भी होता है। दोनों स्थितियां सामान्य जोखिम कारकों को साझा करती हैं, जिनमें मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, पारिवारिक इतिहास, आयु शामिल हैं। यह बातें रविवार को इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के सभागार में मधुमेह व उच्च रक्तचार पर एक वैज्ञानिक संगोष्ठी के दौरान कार्यक्रम में मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. अनुभा श्रीवास्तव ने कहीं।

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उन्होंने बताया कि अनियंत्रित मधुमेह और उच्च रक्तचाप गुर्दे (नेफ्रोपैथी), आंखें (रेटिनोपैथी), हृदय (कार्डियोमायोपैथी), मस्तिष्क (आघात) जैसे अंगों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में जीवन शैली में (स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, वजन प्रबंधन), दवाएं (मौखिक हाइपोग्लाइसेमिक, इंसुलिन, एंटीहाइपरटेन्सिव), नियमित निगरानी (रक्त ग्लूकोज, रक्तचाप, लिपिड प्रोफाइल), दिशानिर्देश और सिफारिशें अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (एडीए) और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) को शामिल करके सुरक्षित रह सकते हैं। वरिष्ठ नेफ्रोलॉजी डॉ. सौम्या गुप्ता ने बताया कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप, दोनों ही गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। मधुमेह से गुर्दे की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। उच्च रक्तचाप से गुर्दे की रक्त वाहिकाएं संकुचित हो जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह कम हो जाता है। इससे गुर्दे ठीक से काम नहीं कर पाते।

मधुमेह और उच्च रक्तचाप से गुर्दे की बीमारी (क्रोनिक किडनी रोग या सीकेडी) हो सकती है। सीकेडी में गुर्दे की क्षमता कम हो जाती है और वह अपशिष्ट को हटाने और शरीर में तरल पदार्थ और रासायनिक संतुलन बनाए रखने में असमर्थ हो जाते हैं। मधुमेह से पीड़ित महिलाओं में पुरुषों की तुलना में किडनी संबंधी जटिलताओं का अनुभव होने की संभावना ज्यादा होती है। इस अवसर पर एएमए उपाध्यक्ष डॉ. ज्योति भूषण, चेयरपर्सन डॉ. सुबोध जैन, डॉ. पीयूष सक्सेना, डॉ. कमल सिंह, डॉ. अशोक कुमार मिश्रा सहित अन्य मौजूद रहे। संवाद

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