केस नंबर 2
कोरांव निवासी एक 10 वर्षीय बच्चे को दादी के डिब्बे से निकालकर कच्ची तंबाकू खाने की आदत पड़ गई। परिजनों को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। कच्ची तंबाकू खाने के बाद बच्चा सुस्त रहता और उसके व्यवहार में भी परिवर्तन होने लगा। जब चार महीने पहले उसे कॉल्विन लाया गया, तो उसने इस बात का जिक्र किया। फिलहाल बच्चे की काउंसलिंग चल रही है और वह नशे से दूर है।
केस नंंबर 3
संगम क्षेत्र के रहने वाले एक 14 वर्षीय बच्चे को सिगरेट पीने की आदत पड़ गई। एक दिन जब वह सिगरेट पीकर घर आया, तो पिता को उसके हाथ सिगरेट के फिल्टर की बू आई, वह समझ गए कि बेटा बुरी आदत का शिकार हो गया है। पिता ने बेटे की काउंसलिंग शुरू करा दी। मगर कुछ ही दिन बाद बच्चे ने काउंसलिंग में जाना छोड़ दिया और फिर से सिगरेट पीने लगा। वहीं उसे दोबारा अस्पताल लाया गया है, जहां उसकी काउंसलिंग चल रही है।
सरकार ने जारी किया है क्विट टोबैको हेल्प लाइन नंबर
तंबाकू से नशे की लत को बढ़ता हुए देखते हुए सरकार ने क्विट टोबैको प्रोग्राम की शुरुआत की है। जिसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर 1800112356 भी जारी किया गया है। जहां पर काउंसलिंग करके लोगों को नशे से होने वाली हानियों के संबंध में जानकारी दी जाती है।
तंबाकू के नशे का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पिछले एक साल के अंदर 2200 बच्चों की काउंसलिंग की गई है। हमारे यहां जब कोई भी बच्चा आता है, तो उसे नशा न करने के बारे में कहा जाता है। बच्चे की इच्छा शक्ति ही उसे इससे बाहर निकालती है। कई बच्चों ने इसे करके भी दिखाया है। - डॉ. राकेश पासवान, मनोचिकित्सक परामर्शदाता, कॉल्विन
कई स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे फिल्म, टीवी, सीरियल या फिर परिवार में किसी अन्य को देखकर नशे की तरफ आकर्षित होते हैं। ऐसे में हमें चाहिए कि बच्चों के सामने नशे से संबंधित कोई भी प्रचार-प्रसार न करें, उसके अलावा उनसे कोई नशे से संबंधित सामग्री भी न मंगवाएं। - डॉ. ऊषा चंद्रा, निदेशक, मनोविज्ञानशाला, प्रयागराज।