कोरोना से बचाव के लिए प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर के सभी विद्यालयों में साफ-सफाई के साथ छिड़काव करने का निर्देश दिया गया है। सरकार के निर्देश के बाद भी विद्यालयों में सफाई कर्मी की कोई व्यवस्था नहीं होने से सफाई एवं छिड़काव की व्यवस्था लागू करना संभव नहीं हो रहा है। जनपद के अधिकांश प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शौचालय विद्यालय में स्थाई सफाई कर्मी नहीं होने के चलते हमेशा गंदे ही रहते हैं। सफाई नहीं होने से विद्यालयों में हमेशा बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है।
जिले के कुल साढ़े तीन हजार से अधिक परिषदीय विद्यालयों में बने शौचालयों में आधे से भी कम में रनिंग वाटर सप्लाई की व्यवस्था है। रनिंग वाटर सप्लाई की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शौचालय सफाई कर्मी नहीं होने से गंदे ही रहते हैं। बच्चों को बीमारी का डर बना रहता है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दिशा निर्देश जारी होने के बाद स्थानीय स्तर पर बीएसए की ओर से दिशा निर्देश जारी करके विद्यालय के प्रधानाध्यापकों से सफाई की व्यवस्था कराने को कहा गया है। अब सफाई कर्मी की नियुक्ति नहीं होने के बाद शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि क्या वह स्वयं शौचालयों की सफाई करें। जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा ने विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने दिनभर में बार विद्यालय के हर कमरे का सैनेटाइज करने की सलाह देने के साथ सफाई करने का निर्देश दिया है। अब सफाई कर्मी नहीं होने से विद्यालयों को साफ रखने की व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है। प्रधानाचार्यों का कहना है कि साफ-सफाई के लिए शासन से किसी प्रकार के धन की व्यवस्था नहीं होने से उनके सामने संकट खड़ा हो गया है।