एनसीटीई ने 20 अगस्त 2010 को अधिसूचना जारी कर पूरे देश में प्राइमरी स्कूलों में टीचरों की नियुक्ति के लिए टीईटी पास होने की शैक्षिक अर्हता निर्धारित कर दी। इस अधिसूचना के अनुसार 20 अगस्त 2010 के बाद प्राइमरी स्कूलों के टीचरों की नियुक्ति के लिए टीईटी अर्हता रखना अनिवार्य कर दिया गया।
सरकार की ओर से कहा गया कि मुरादाबाद के फलाह-ए-दरेन इंटर कॉलेज कनथ दरवाजा स्ट्रीट विद्यालय के दो टीचरों, मुशाहिद अली खान तथा मोहम्मद नाजिम की नियुक्ति प्रबंधक ने अगस्त 2012 में की है। नियुक्ति की तिथि पर यह दोनों टीचर टीईटी पास नहीं थे। इस कारण इनकी नियुक्तियां अवैध हैं और एकल जज की ओर से इनके वेतन भुगतान का आदेश देना भी है।
टीचरों की ओर से अधिवक्ता जेपी सिंह का कहना था कि अल्पसंख्यक विद्यालयों में नि:शुल्क बाल शिक्षा अधिकार कानून 2009 लागू नहीं होता। ऐसी स्थिति में इन टीचरों के लिए टीईटी की अर्हता जरूरी नहीं है। हाईकोर्ट ने इन टीचरों के वेतन भुगतान आदेश को लेकर पारित एकल जज के आदेश पर रोक लगा दी है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि दोनों पक्ष अपनी लिखित बहस कोर्ट के सामने प्रस्तुत करें कि क्या अल्पसंख्यक विद्यालयों के अध्यापकों को टीईटी की जरूरी योग्यता रखने के लिए सरकार उन्हें विवश कर सकती है। क्या सरकार का यह कदम उन्हें संविधान में प्रदत्त अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा। हाईकोर्ट सरकार की इस विशेष अपील पर 21 जनवरी 2023 को सुनवाई करेगी।