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Prayagraj : आधार सत्यापन के बिना अब नहीं होगी रजिस्ट्री, कल से व्यवस्था लागू

Sat, 31 Jan 2026 03:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जमीन या मकान की रजिस्ट्री में अब फर्जीवाड़ा नहीं होगा। बिना आधार सत्यापन के रजिस्ट्री नहीं होनी। यह व्यवस्था एक फरवरी से लागू होने जा रही है।
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aadhaar aadhar आधार आधार - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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जमीन या मकान की रजिस्ट्री में अब फर्जीवाड़ा नहीं होगा। बिना आधार सत्यापन के रजिस्ट्री नहीं होनी। यह व्यवस्था एक फरवरी से लागू होने जा रही है। आधार सत्यापन से फर्जी दस्तावेज से जुड़े विवादों पर लगाम लगेगी और जमीन-जायदाद से संबंधित विवादों में भी कमी आएगी। इसके लिए निबंधन विभाग के सभी उप निबंधक कार्यालय में बायोमीट्रिक मशीनें मंगा ली गई हैं।

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रजिस्ट्री और स्टाम्प सत्यापन से जुड़े कार्य के लिए आधार कार्ड सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि, एक फरवरी को रविवार का साप्ताहिक अवकाश है। ऐसे में दो फरवरी को जब निबंधन कार्यालय खुलेगा तो बिना आधार सत्यापन के रजिस्ट्री नहीं होगी। प्रयागराज की आठ तहसीलों में स्थित नौ उप निबंधन कार्यालयों में प्रतिदिन अधिकतम औसतन 400 के आसपास रजिस्ट्री होती है। प्रशासन को इससे फर्जीवाड़ा कम होने की उम्मीद है।

एआईजी स्टाम्प राकेश चंद्रा ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिना आधार सत्यापन के कोई भी दस्तावेज आगे नहीं बढ़ेगा। रजिस्ट्री, बैनामा, बंधक, वसीयत, स्टाम्प के क्रय-विक्रय सहित सभी प्रक्रिया में संबंधित पक्षकारों का आधार कार्ड से बायोमीट्रिक सत्यापन होगा।
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आधार की बायोमीट्रिक प्रणाली से यह सुनिश्चित होगा कि वास्तविक व्यक्ति ही दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रहा है। एआईजी स्टाम्प राकेश चंद्रा के अनुसार रजिस्ट्री के दौरान आधार कार्ड नंबर डालते ही व्यक्ति की पूरी जानकारी मिल जाएगी। बायोमीट्रिक प्रक्रिया में अंगूठे या उंगलियों का निशान लेने पर पहचान पुख्ता होगी।

एआईजी स्टाम्प ने लोगों से अपील की है कि अपने आधार कार्ड में नाम, पता, मोबाइल नंबर और बायोमीट्रिक विवरण अपडेट करा लें ताकि रजिस्ट्री के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। जिनके आधार पर फिंगरप्रिंट या आंखों की स्कैनिंग में दिक्कत आती है, पहले ही आधार केंद्र में जाकर इसमें सुधार करा लें।

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अब तक सिर्फ पहचान पत्र देखकर होती थी रजिस्ट्री
अब तक सिर्फ पक्षकारों के पहचान पत्र देखकर संपत्ति की रजिस्ट्री की जाती थी। पहचान पत्र वास्तविक है या फर्जी, इसके सत्यापन की व्यवस्था निबंधन विभाग के पास नहीं थी। अगर बाद में पहचान पत्र फर्जी निकला तो विवाद उत्पन्न होता था और मामला न्यायालय तक जाता था। इससे मुकदमों की संख्या भी तेजी से बढ़ती थी। आधार सत्यापन के लिए बायोमीट्रिक व्यवस्था लागू होने से इस सब से छुटकारा मिलने की उम्मीद है।

तहसीलवार होने वाली रजिस्ट्री की औसतन संख्या

फूलपुर में 70 से 80
सोरांव में 60 से 70

करछना में 40 से 45
हंडिया में 35 से 40

बारा में 30 से 35
कोरांव में 10 से 12

मेजा में 20 से 25
सदर में 70 से 80
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