पुण्य स्नान संग शिविर-शिविर होगा भंडारा
पौष पूर्णिमा से शुरू कल्पवास रविवार को माघी पूर्णिमा पर पुण्य की डुबकी लगाने के साथ ही पूरा होगा। एक माह तक तंबुओं की नगरी में बसे कल्पवासी पुण्य की गठरी समेट और संगम की रेती लेकर अपने-अपने घरों को रवाना हो जाएंगे। इससे पहले शिविर-शिविर भंडारा होगा। कल्पवासी संकल्प के मुताबिक पूजन-अर्चन कर दान करेंगे।
एक फरवरी को माघी पूर्णिमा स्नान के साथ ही कल्पवासियों की घर वापसी शुरू हो जाएगी। प्रशासन का भी इस बात पर जोर है कि कल्पवासियों के साथ स्नान को आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षित घर वापसी हो। मेला प्राधिकरण की बैठक में अधिकारियों ने मेला क्षेत्र से कल्पवासियों को बाहर निकलने के लिए एकल मार्ग की दिशा दी जाएगी। साथ ही शुक्रवार को उनके वाहन मेला क्षेत्र के शिविरों तक ले जाने की व्यवस्था की गई, जिससे रविवार या सोमवार को वह सामान लेकर घर जा सकें।
कल्पवासी पूजन-अर्चन कर घर ले जाएंगे तुलसी का बिरवा
कल्पवास के संकल्प के दिन पौष पूर्णिमा को कल्पवासी शिविर या रावटी (जिसमें रहते हैं) के बाहर जौ बोकर तुलसी का बिरवा रोपते हैं। कई श्रद्धालु घर से ही गमले में लगा तुलसी का पौधा लाते हैं। माघी पूर्णिमा स्नान के बाद साधक कल्पवासी उगी हुई जौ और तुलसी को या तो पूजन के बाद गंगा में प्रवाहित करते हैं या फिर तुलसी को घर ले जाकर साल भर पूजते हैं।