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High Court : कोई भी अपने ही मामले में न्यायाधीश या जांचकर्ता नहीं हो सकता, हाईकोर्ट की टिप्पणी

Mon, 01 Jun 2026 05:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायशास्त्र का सिद्धांत है कि कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश या जांचकर्ता नहीं हो सकता। जिन पुलिस कर्मियों पर आरोप लगे हों, उन्हीं के थाने के प्रभारी से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायशास्त्र का सिद्धांत है कि कोई भी व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश या जांचकर्ता नहीं हो सकता। जिन पुलिस कर्मियों पर आरोप लगे हों, उन्हीं के थाने के प्रभारी से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की अपेक्षा नहीं की जा सकती। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति गौतम चौधरी की एकल पीठ ने सोनभद्र के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट(सीजेएम) की ओर से दिए गए जांच के आदेश को निरस्त कर दिया।

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याची उर्मिला देवी ने आरोप लगाया था कि रॉबर्ट्सगंज थाने के दो पुलिस कर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। बाइक की चाबी छीन ली और वाहन लेकर चले गए। घटना की सूचना थाने में देने के बावजूद रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई और उन्हें धमकी दी गई। इसके बाद उन्होंने अदालत में परिवाद दायर किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की जांच रॉबर्ट्सगंज थाने के प्रभारी को सौंप दी थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया कि आरोप उसी थाने के पुलिस कर्मियों पर है। इसलिए थाने के प्रभारी की ओर से निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।

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