क्षेत्र का हेल्थ वेलनेस सेंटर पांच वर्षों से बिना डॉक्टर के संचालित हो रहा है। चिकित्सक कक्ष की कुर्सियों पर धूल जमी है। दवाइयों पर मकड़ी के जाले हैं। दो दर्जन ज्यादा गांवों और 15 वार्डों की आबादी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचती है लेकिन डॉक्टरों और सुविधाओं के अभाव में उन्हें इलाज नहीं मिल रहा है।
वर्ष 2006 में पीएचसी बनाया गया। इस दौरान दो डॉक्टर समेत सात लोगों के पद सृजित किए गए लेकिन पिछले पांच साल डॉक्टर नहीं हैं। फार्मासिस्ट राजेश मौर्य और लैब टेक्नीशियन के भरोसे मरीजों का इलाज हो रहा है। वहीं, अस्पताल के अंदर का हिस्सा जर्जर हो चुका है।
फर्श टूटी और दरवाजे उखड़े हैं। खास यह है कि शासन ने अस्पताल को वेलनेस सेंटर घोषित कर रखा है पर यहां प्राथमिक उपचार के बुनियादी उपकरण तक नहीं हैं।
वेलनेस सेंटर का दर्जा, बीपी नापने की सुविधा नहीं : अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए पीएचसी को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किया गया। इसके लिए परिसर के बाहर बाकायदा बोर्ड लगे हैं लेकिन यहां बीपी नापने का मशीन तक नहीं है।