कोरोना पॉजिटिव की मौत होने पर शव का अंतिम संस्कार सामान्य रूप से नहीं होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अलग-अलग धर्मों संप्रदायों की परंपराओं का ध्यान रखते हुए एक विस्तृत गाइड लाइन जारी की है।
इसके अनुसार शवों को लकड़ी से नहीं जलाने दिया जाएगा और न ही सामान्य प्रक्रिया के तहत दफनाने दिया जाएगा। इस संबंध में 29 अप्रैल को इस मामले में सीएमओ कार्यालय में सभी धर्मों के गुरुओं को आमंत्रित किया गया है। वहां उन्हें कोविड 19 संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के बारे में बताया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से धर्मगुरुओं को प्रशिक्षित किए जाने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों को नामित भी कर दिया गया है। एसीएमओ डॉ. महानंद को नोडल ऑफिसर बनाया गया है जबकि वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मीशम जैदी को बतौर ट्रेनर नामित किया गया है।
ट्रेनर डॉ. मीशम जैदी ने बताया कि गाइडलाइन के मुताबिक अगर किसी कोरोना पॉजिटिव की मौत होती है तो उसे उसके धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार की छूट है लेकिन उसमें थोड़ा संशोधन किया गया है। जैसे हिंदू रीति में शवों को दारागंज घाट स्थित शवदाह गृह में जलाया जाएगा। मुस्लिम और क्रिश्चियन में अंतिम संस्कार के लिए छह फीट गड्ढा खोदना होगा।
शव उसमें रखने से पहले गड्ढे को सैनिटाइज करना होगा। इसके बाद थोड़ी सी मिट्टी डालने के बाद फि सैनिटाइज किया जाएगा। यह प्रक्रिया तीन बार होगी। डॉ मीशम जैदी ने बताया कि बुधवार को धर्मगुरुओं को दी जाने वाली ट्रेनिंग में इन सब बातों की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए शहर काजी के साथ मौलाना, पादरियों, संतों, श्मशान घाट प्रबंधक, दारागंज शवदाह गृह प्रबंधन कमेटी, कब्रिस्तान प्रबंधन कमेटी सहित अंतिम संस्कार की प्रक्रिया से जुड़े लोगों को बुलाया गया है।
दूसरे प्रदेशों से आ रहे लोगों से बढ़ा संक्रमण का खतरा
देश के दूसरे हिस्सों से लौटे तीन स्थानीय लोगों में कोरोना की पुष्टि होने से जिस तरह बीमारी का खतरा बढ़ा है, उसे देखते हुए आने वाले कई हफ्ते जिले के लोगों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। चार दिनों में दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, फरीदाबाद, चेन्नई, पुणे, चंडीगढ़ आदि स्थानों से 12 सौ से अधिक लोग आए हैं। इनमें से मात्र एक हजार ही क्वारंटीन हैं जबकि, बहुत से लोग ऐसे भी हैं, जो सीधे घर पहुंच रहे हैं। इसका रिकार्ड प्रशासन के पास नहीं है।
जिला प्रशासन के आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार दिनों से क्वारंटीन हुए एक हजार लोग ज्यादातर लोग उन शहरों से आए हैं, जहां कोरोना का प्रकोप फैला हुआ है। इन लोगों को शहर के विभिन्न गेस्ट हाउसों और तहसील मुख्यालयों में स्कूलों में बनाए गए क्वारंटीन सेंटर्स में रखा गया है। इन्हें 14 दिनों के बाद ही छोड़ा जाएगा। लेकिन इसके अलावा भी लोग पैदल या फिर दो पहिया, चार पहिया या फिर किसी अन्य माध्यमों से आए हैं। वे सीधे अपने घर पहुंच गए हैं। ऐसे लोगों से खतरा अधिक है। उनकी सूचना भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को नहीं है। हालांकि कंट्रोल रूम में ऐसे लोगों की शिकायत भी पहुंच रही हैं।
प्रशासनिक अफसरों ने बताया कि सोमवार को भी धूमनगंज, नैनी, जार्जटाउन, सिविल लाइंस, दारागंज, तेलियरगंज सहित जिले के विभिन्न इलाकों की चौकियों पर तैनात पुलिस वालों ने सूचना पर कई लोगों को पकड़कर क्वारंटीन किया है। लेकिन यह संख्या बहुत कम हैं। मऊआइमा, हंडिया, कोरांव, शंकरगढ़, सोरांव, मेजा, बारा आदि तहसीलों के बहुत से ऐसे लोग हैं, जो सीधे ही अपने घरों को पहुंचे।
उनकी न तो स्क्रीनिंग हो सकी है और न ही स्वास्थ्य परीक्षण हुआ है। सीएमओ मेजर डॉ0 जीएस बाजपेई कहते हैं कि ऐसे लोगों से आने वाले दो-तीन हफ्तों तक कोरोना का संक्रमण फैलने का खतरा अधिक बढ़ गया है। हालांकि जहां से भी सूचनाएं मिल रही हैं लोगों को ट्रैस कर क्ववारंटीन कराया जा रहा है।