इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत पैतृक संपत्ति और तीन वाहनों की कुर्की समाप्त कर उन्हें वैध स्वामियों को लौटाने का निर्देश दिया। कहा कि गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति कुर्क करना एक असाधारण शक्ति है। इसका प्रयोग तभी किया जा सकता है, जब यह ठोस साक्ष्यों से साबित हो कि संबंधित संपत्ति अपराध की कमाई से अर्जित की गई है। संदेह या अनुमान के आधार पर कुर्की का आदेश नहीं दिया जा सकता।
यह आदेश न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने अर्जुन जायसवाल व तीन अन्य की याचिका पर दिया। मामला गोरखपुर के बेलीपार थाने में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे से जुड़ा है। पुलिस का आरोप था कि अर्जुन जायसवाल संगठित गिरोह का सदस्य है। उसने अपराध से अर्जित धन से चल-अचल संपत्तियां खरीदी हैं।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि मकान पैतृक है। कई पीढ़ियों से परिवार के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं। परिवार को राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण का मुआवजा मिला था। कृषि और वैध व्यापार से भी आय होती रही है। तीनों वाहन बैंक ऋण के माध्यम से खरीदे गए थे और उनके सभी दस्तावेज उपलब्ध हैं।
कोर्ट ने गोरखपुर के डीएम की ओर से 25 जनवरी 2021 को पारित कुर्की आदेश और विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) के 19 नवंबर 2022 के आदेश में संशोधन किया। कहा कि प्रशासन संपत्ति और अपराध की कमाई के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने वाला साक्ष्य, जैसे बिक्री विलेख, बैंक लेनदेन, मूल्यांकन रिपोर्ट या अन्य स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका।
हालांकि, कोर्ट ने एक वाहन अन्य के नाम पर पंजीकृत होने के कारण उस पर कुर्की बरकरार रखी। उसके स्वामी ने न तो कोई आपत्ति दाखिल की और न ही कोर्ट में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निचली अदालत के आदेश में संशोधन कर दिया।